
बरठीं (बिलासपुर)। स्वास्थ्य सेवाओं में अव्यवस्था के चलते एक युवक की जान चली गई। युवक की तबीयत बिगड़ने पर परिजन उसे तत्काल अस्पताल ले आए थे लेकिन इलाज के लिए कोई मौजूद नहीं था। इस लापरवाही से सुन्हाणी का विजय जिंदगी की जंग हार गया। इससे जहां परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है, वहीं छह साल के मासूम अंशु के सिर से पिता का साया भी छिन गया।
सुन्हाणी पंचायत के विजय (35) की तबीयत मंगलवार शाम अचानक बिगड़ गई। ताया सुखदेव कौशल अपनी गाड़ी से विजय को तुरंत बरठीं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले आए। शाम करीब पौने सात बजे जब वे बरठीं अस्पताल पहुंचे तो वहां सिवाय एक चपरासी के कोई नहीं था। परिजनों को स्टाफ के लिए बने एक क्वार्टर में लाइट नजर आई। वे दौड़े-दौड़े वहां पहुंचे। कमरे में एक डेंटल कर्मचारी मौजूद था। पूछने पर उसने बताया कि फार्मासिस्ट छुट्टी पर है। एकमात्र चिकित्सक दिन में यहीं थे। शाम को जरूरत पड़ने पर उन्हें बुलाया जा सकता है। विजय के परिजन उक्त कर्मचारी के साथ काफी समय तक डाक्टर को यहां-वहां ढूंढते रहे लेकिन वह नहीं मिले।
इस बीच विजय की तबीयत लगातार बिगड़ती जा रही थी। थक-हारकर 108 एंबुलेंस के माध्यम से घुमारवीं अस्पताल के लिए कूच किया गया लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। समय पर उपचार न मिलने के कारण विजय दम तोड़ चुका था। सुन्हाणी पंचायत की प्रधान गायत्री देवी और उपप्रधान बुद्धि सिंह परमार के साथ ही शकुंतला कौशल, सदाराम शर्मा, निक्काराम, श्रीराम, जगदीश चंद, सुनीता तथा किशोरीलाल का कहना है कि इस घटना ने एक बार फिर से स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोलकर रख दी है। परिजनों ने उसे पौने सात बजे बरठीं पहुंचा दिया था। यदि ऐसा पता होता कि यहां डाक्टर नहीं मिलेंगे तो परिजन बरठीं आने के बजाए उसे सीधे घुमारवीं ले जाते। समय पर उपचार मिल जाता तो शायद उसकी जान बच सकती थी। उन्हाेंने सरकार और विभाग से इस मामले की जांच कर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
उधर झंडूता के बीएमओ डा. एनके आंगरा ने कहा कि बरठीं सीएचसी में चिकित्सकों के चार पद हैं लेकिन वहां एक ही डाक्टर कार्यरत है। संबंधित चिकित्सक इन दिनों ट्रेनिंग के चलते बंगलुरू में हैं। बुहाड़ से डाक्टर को डेपुटेशन पर बरठीं भेजा है। रात के समय फार्मासिस्ट और नर्स की ड्यूटी होती है। जांच की जाएगी कि कर्मचारी ड्यूटी पर क्यों नहीं थे। दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
