बिजली लाइन बिछाने में गोलमाल

शिमला: राज्य बिजली बोर्ड इम्प्लाइज यूनियन ने बोर्ड की मौजूदा वित्तीय हालत के लिए बोर्ड प्रबंधन को जिम्मेदार मानते हुए आड़े हाथों लिया है। बिजली बोर्ड कर्मचारी यूनियन ने प्रबंधन की कारगुजारियों का खुलासा करते हुए ऊहल तृतीय स्टेज चुल्हा-बस्सी 132 केवी सिंगल सर्किट लाइन के ऊपर तारें बिछाने में अनियमितता बरतने के आरोप लगाए हैं।

 

यूनियन का दावा है कि इस सिंगल सर्किट लाइन को बिछाने में 248 लाख/किमी की दर से टैंडर दिए गए जबकि इसी दौरान हमीरपुर-बस्सी डबल सर्किट लाइन बिछाने में 3 लाख/किमी की दर से हुए। यूनियन ने आरोप लगाया है कि सिंगल लाइन सर्किट और डबल लाइन सर्किट लाइन बिछाने के लिए टैंडर कीमतों में बहुत ही मामूली अंतर है लेकिन इसके बावजूद चुल्हा-बस्सी लाइन में घटिया गुणवत्ता की डिस्कें लगाई गईं जिससे यह लाइन चालू ही नहीं हो पाई।

 

आरोप है कि अब इस चुल्हा-बस्सी सिंगल सर्किट लाइन को चालू करने के लिए इन तारों को उतारा जा रहा है और यह कार्य बोर्ड के 18-20 कर्मियों को दिया गया है जबकि यह कार्य ठेका लेने वाली कंपनी की जिम्मेदारी है। यहां तक बताया जा रहा है कि सिंगल सर्किट लाइन को बदलने के लिए तैनात किए गए कर्मियों में अधिकतर की उम्र 50 से ऊपर है और कर्मियों की संख्या कम होने के कारण दुर्घटना की आशंका बनी हुई है।

 

यूनियन पदाधिकारियों का कहना है कि सिंगल सर्किट लाइन पर बिछी तारों को सामान्य तौर पर बदलने के लिए कम से कम 30-35 कर्मियों की दरकार रहती है जिससे यह कार्य इन कर्मियों की जान के लिए खतरा बना हुआ है। यूनियन पदाधिकारियों का आरोप है कि घटिया गुणवत्ता की डिस्कें खरीदने के कारण यह पूरी लाइन चालू नहीं हो पाई और अब यह कार्य दोबारा करना पड़ रहा है।

 

बिजली बोर्ड इम्प्लाइज यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप सिंह  खरवाड़ा ने इस पूरे मामले की जांच की मांग करते हुए घटिया सामग्री की खरीद के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। खरवाड़ा ने एलान किया है कि कर्मचारी यूनियन बहुत जल्द प्रदेश स्तर पर पोल खोलो अभियान चलाकर ऐसे अधिकारियों की कारगुजारियों को बेनकाब करेगी। खरवाड़ा ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से भी हस्तक्षेप की मांग की है।

 

इस पूरे मामले पर बिजली बोर्ड लिमिटेड के प्रबंध निदेशक पीसी नेगी ने कहा कि टैंडर प्रक्रिया में जो रेट खुलेगा वही तय करना पड़ता है और इसमें ठेकेदार की कोई गलती नहीं दिखती, उसने तो अपना काम किया और चला गया। उनका कहना है कि डिस्कों की खरीद में गड़बड़ी हुई है क्योंकि बिना टैस्ंिटग डिस्क खरीद नहीं होती, अब खराब डिस्कों की खरीद की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई होगी। उन्होंने 50 साल से अधिक उम्र के कर्मियों के सवाल पर कहा कि इस बारे में वह फील्ड अधिकारियों से बात कर कोई बेहतर विकल्प ढूंढने की कोशिश करेंगे।

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