बिजली कर्मियों की हड़ताल से पिसेगी जनता

हल्द्वानी। पावर कारपोरेशन के तीनों निगमों के कर्मचारी सात सूत्रीय मांगों को लेकर आज से प्रदेश भर में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर रहेंगे, जिसका खामियाजा जनता को भुगतना होगा। पहले ही रुद्रपुर प्रकरण में काम बंद हड़ताल के चलते 85 प्रतिशत लोगों के बिल जमा नहीं हो पाए हैं। अब शुक्रवार से प्रस्तावित अनिश्चितकालीन हड़ताल के चलते लोगों को फिर बिल जमा कराने के लिए इंतजार करना पड़ेगा। सूत्रों के मुताबिक देरी से बिल जमा करने पर उपभोक्ताओं को अगले बिलों में अलग से सरचार्ज देना होगा।
पावर कारपोरेशन के सहायक अभियंता केके पंत बताते हैं कि अनिश्चितकालीन हड़ताल के दौरान बिल जमा करने समेत सभी तरह के काम बंद रहेंगे। केवल बिजली व्यवस्था जारी रहेगी। ईई प्रदीप चौधरी ने बताया कि 23 मई से 11 जून तक बिजली बिल भी जमा नहीं हो पाए। उन्होंने बताया कि प्रत्येक दिन करीब छह लाख रुपए बिजली बिल के रुपये विभाग को प्राप्त होते हैं, जिन्हें अब जमा कराया जा रहा है।

इसलिए हो रही हड़ताल
ऊर्जा के तीनों निगमों (जल विद्युत निगम, पिटकुल, यूपीसीएल) ने समयबद्ध-वेतनमान व्यवस्था पूर्व की भांति बहाल रखने, 9, 14 एवं 19 वर्ष की सेवा पूर्ण करने वाले कार्मिकों को प्रथम, द्वितीय और तृतीय समयबद्ध-वेतनमान देने समेत सात सूत्रीय मांगों को लेकर 14 जून से अनिश्चितकालीन आंदोलन का ऐलान किया है। कार्मिकों ने रिटायरमेंट बेनिफिट्स (उत्तरांचल) संशोधन रूल्स के हिसाब से पेंशन और सामान्य भविष्य निधि की सुविधा देने, सभी भत्तों का वर्तमान महंगाई के हिसाब से पुनरीक्षण करने, प्रोन्नति पर वार्षिक वेतनवृद्धि की तिथि अपरिवर्तित करने, तीनों निगमों कर्मियों को ग्रेड पे 6600 अनुमन्य करने, तीनों निगमों में रिक्त तृतीय, चतुर्थ श्रेणी पदों पर नियुक्ति करने, तीनों निगमों के कर्मचारी, अधिकारियों के ग्रेड पे की विसंगतियां दूर करने की मांग की गई है।

एक गुट ने किया हड़ताल का बहिष्कार
उत्तराखंड ऊर्जा आफीसर्स, सुपरवाइजरर्स एंड स्टाफ एसोसिएशन ने शुक्रवार से प्रस्तावित हड़ताल में शामिल नहीं होने का निर्णय लिया है। हीरानगर में हुई बैठक में विद्युत अधिकारी, कर्मचारी संघर्ष मोर्चा द्वारा 14 जून से प्रस्तावित हड़ताल पर विचार विमर्श किया गया। संगठन का आरोप है कि अन्य संगठनों को साथ न लेकर हड़ताल का ऐलान करना गैरकानूनी है, जिन मांगों को लेकर हड़ताल की जा रही है, यह 2009 से चल रही है। सभी के एक मंच पर नहीं आने से समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है। वक्ताओं ने कहा कि वह मांगों का समर्थन करते हैं लेकिन केंद्र के आह्वान के बाद ही हड़ताल में शामिल होंगे। बैठक में केंद्रीय कार्यकारी अध्यक्ष डीसी गुरुरानी, हरीश जोशी, भुवन भट्ट, यूसी पांडे, शिवशंकर जोशी, मधु जोशी, गिरजेश पंत आदि थे।

जनता के लिए खुले हैं उपभोक्ता फोरम के दरवाजे
विद्युत शिकायत निवारण मंच के सदस्य मनीष ओली के मुताबिक कर्मचारियों की हड़ताल के कारण उपभोक्ताओं के बिल जमा नहीं होते हैं और उन पर अलग से सरचार्ज लगाया जाता है तो उपभोक्ता अलग से या समूह के रूप में उपभोक्ता फोरम में अपनी बात रख सकते हैं, जहां उनकी समस्या सुनने के बाद निर्णय दिया जा सकता है।

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