
चंपावत। चंद राजाओं की राजधानी रहे चंपावत में कई ऐतिहासिक धरोहरें हैं। बालेश्वर महादेव मंदिर धर्म ही नहीं विरासत की भी मिसाल है, लेकिन केंद्रीय पुरातत्व विभाग की संरक्षित इस विरासत पर ग्रहण लग रहा है। मंदिर परिसर के 100 मीटर के दायरे में निर्माण कार्य प्रतिबंधित हैं, बावजूद इसके यहां बेरोकटोक निर्माण कार्य चल रहे हैं। पुरातत्व विभाग ने इस संबंध में नोटिस भेजने के अलावा कोई कार्य नहीं किया है।
मंदिर के महंत भैरव गिरि बताते हैं कि अजंता-ऐलोरा के पैटर्न पर हुई नक्काशी वाले इस मंदिर में शिवलिंग, चंपा देवी सहित कई देवी-देवताओं की मूर्ति हैं। 13वीं सदी में निर्मित इस मंदिर समूह में गारे का प्रयोग नहीं किया गया था। मंदिर निर्माण में पत्थरों को इस तरह रखा गया था कि सदियों बाद भी बुलंदी से खड़े हैं। वर्ष 1980 में केंद्रीय पुरातत्व विभाग ने इसे संरक्षण में लिया था। पुरातत्व विभाग का जिम्मा मंदिर की देखरेख तथा मरम्मत और मंदिर में स्वामित्व महंतों का रहेगा।
