
कृपया ध्यान दें! दीपावली पर रॉकेट अपनी जिम्मेदारी पर दागें, राजधानी में पानी का घोर अकाल है, आग बुझाने के लिए कोई नहीं आने वाला।
आग बुझाने के लिए पानी की आपूर्ति के लिए शहर में 67 हाईड्रेंट बनाए गए हैं। लेकिन इसमें से 55 बंद हैं, जो 12 चल रहे हैं उनमें भी प्रेशर से पानी नहीं आता।
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टंकियों पर बनाए गए ऑउटलेट वॉल्व
ऐसे में फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को जल संस्थान की टंकियों पर बनाए गए ऑउटलेट वॉल्व के भरोसे रहना पड़ता है। गाड़ी खाली होने पर पानी लाने के लिए दोबारा वहीं दौड़ना पड़ता है।
ऐसे में यदि शहर में कहीं आग लग जाए तो उसे बुझाना मुश्किल हो जाएगा। दिवाली के मौके पर तो यह तस्वीर अधिक डरावनी हो जाती है।
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पटाखों की दुकानें सजी
दीपावली नजदीक आते ही बाजारों से लेकर गलियों तक में पटाखों की दुकानें सज जाती हैं। साथ ही बढ़ जाती हैं अगजनी की घटनाएं। दिवाली के दिन तो आग की कई घटनाएं हो जाती हैं।
लेकिन आग से निपटने के लिए प्रशासन और दमकल विभाग के पास ठोस इंतजाम नहीं हैं। अक्सर फायर ब्रिगेड वालों को पानी नहीं मिल पाता। कई साल पहले इस समस्या से निपटने के लिए हाईड्रेंट की व्यवस्था की गई थी।
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फायर ब्रिगेड की गाड़ियों में पानी
आग लगने पर समीप के हाईड्रेंट को खोलकर फायर ब्रिगेड की गाड़ियों में पानी भर लिया जाता था। लेकिन आबादी बढ़ने और जगह-जगह भवन निर्माण होने की वजह से हाईड्रेंट घटते जा रहे हैं। मुख्य लाइन से ज्यादा लाइनें निकलने और पानी के अधिक आबादी में बंटने से बचे हाईड्रेंट से भी प्रेशर से पानी नहीं आता।
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यहां हैं पानी की टंकियों पर आउटलेट वाल्व
परेड ग्राउंड, निरंजनपुर सब्जी मंडी, वसंत विहार, गढ़ी कैंट, बन्नू स्कूल, दिलाराम चौक, फायर ब्रिगेड कार्यालय।
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फायर ब्रिगेड के पास संसाधन
फायर ब्रिगेड के पास नौ फायर टेंडर हैं। दो फायर इंक्सटीग्यूशर मोटरसाइकिल भी हैं, जो भीड़भाड़ वाली जगहों पर तत्काल पहुंचने के लिए रखे गए हैं।
