बारिश ने लगाया सूखे पर मरहम

नूरपुर (कांगड़ा)। मौसम के अचानक करवट बदलते ही किसानों के चेहरों पर रौनक लौट आई है। पिछले करीब डेढ़ माह से गेहूं की अच्छी पैदावार के लिए बारिश के इंतजार में आसमान की तरफ टकटकी लगाए बैठे किसानों की मुराद पूरी हो गई है। यह बारिश रबी सीजन की फसलों खासकर गेहूं के लिए फायदेमंद मानी जा रही है। इससे पहले कांगड़ा जिले के निचले मैदानी इलाकों में ड्राई स्पेल के चलते असिंचित क्षेत्रों में गेहूं की बिजाई में पिछड़े किसानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें झलकने लग पड़ी थीं। अब बारिश से गेहूं की अच्छी फसल होने की आस जगी है। कृषि विशेषज्ञों की मानें तो अभी तक जिन असिंचित इलाकों में गेहूं की बिजाई नहीं हुई है, वहां पर किसान पिछेती किस्म के बीज इस्तेमाल कर सकते हैं। इनमें राज-3765, राज-3377 तथा डीबीडब्ल्यू-17 पिछेती किस्में प्रयोग कर सकते हैं, जोकि दिसंबर माह के अंत तक खेतों में बीजी जा सकती हैं। साथ ही गेहूं की बिजाई से पहले बीज का उपचार सही ढंग से करने की सलाह दी है। इसके लिए ढाई ग्राम बेवस्टीन की मात्रा प्रति किलोग्राम गेहूूं बीज में मिलाकर बीज को उपचारित कर लें।
आंकड़ों के मुताबिक कांगड़ा जिले में करीब 94500 हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की पैदावार होती है और इस साल 1.68 लाख मीट्रिक टन फसल उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। लेकिन, इसमें से सिर्फ 33 हजार हेक्टेयर भूमि में ही सिंचाई सुविधा होने के कारण जिले के अधिकांश किसानों को खेतीबाड़ी के लिए बारिश के पानी पर निर्भर रहना पड़ता है। क्षेत्र के किसानों राय सिंह, सुभाष सिंह, बलवीर सिंह, विचित्र सिंह, विक्रम जंबाल, मुकेश शर्मा, करनैल सिंह, बाबू राम और रतन चंद इत्यादि ने बताया कि यह बारिश फसलों के लिए काफी फायदेमंद है। इससे खासकर निचले मैदानी इलाकों में कोहरे की मार से निजात मिलेगी।

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