बारिश थमे तो बुग्यालों से लौटें अनवाल

बागेश्वर। बारिश का सिलसिला अगर जल्द थमा नहीं तो उच्च हिमालयी क्षेत्रों के बुग्यालों में भेड़-बकरियों के साथ गए दर्जनों अनवाल (भेड़ पालक) मुसीबत में फंस सकते हैं। इस बीच बुग्यालों को जोड़ने वाले रास्ते मलबा आने से बंद हैं। अगर इस वक्त भेड़ पालक बुग्यालों से नीचे उतरना चाहें तो यह संभव नहीं हो पाएगा और अगर अगस्त अंत तक भी बारिश नहीं थमती है तो बंद रास्तों को खोलना किसी चुनौती से कम नहीं होगा।
मल्ला दानपुर के पिंडरघाटी सहित पूरे क्षेत्र में भेड़ पालकों की अच्छी तादाद है। यहां के भेड़ पालक मई से लेेकर सितंबर तक उच्च हिमालय के बुग्यालों में भेड़ें चराने जाते हैं। इसके लिए ग्रामीण बारी-बारी भेड़ों की देखभाल को जाते हैं। वहां मौजूद लोगों के लिए राशन आदि पहुंचाने को भी बारी लगती है। ग्रामीणों के अनुसार इस वक्त बागेश्वर जिले के बुग्यालों में लगभग दस हजार भेड़-बकरियाें के साथ दर्जनों अनवाल हैं। सितंबर के बाद वहां तेज हिमपात की आशंका रहती है। इसी कारण लोग भेड़ बकरियाें को लेकर नीचे उतर आते हैं। इस बार व्यापक भूस्खलन के कारण रास्तों और पैदल पुलों का नवनिर्माण इतनी जल्दी संभव नहीं है। हजारों बकरियों, घोड़ों और कुत्तों के साथ लौटना आसान काम नहीं है। भेड़ों को चराने के लिए अनवाल द्वाली, पकवा टॉप, खलिया टॉप, चिल्ठा, कर्मी चिल्ठा, धाकुड़ी टॉप आदि बुग्यालों में गए हैं।

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