बारिश और ओलावृष्टि ने मचाई तबाही

मंडी। जिले के कई हिस्सों में शनिवार को फिर से तेज बारिश और ओलावृष्टि ने कहर ढाया। इससे जिले की सराजघाटी, कमरूघाटी, उत्तरशाल और चौहारघाटी में नकदी फसलों और सेब को भारी नुकसान हुआ है। ओलावृष्टि से सबसे अधिक नुकसान सेब, नाशपाती, मटर, जौ और गेहूं की फसल को हुआ। सराज घाटी के तहत आने वाले छत्तरी क्षेत्र की दो पंचायतों बरयोगी और काकड़ाधार में सबसे अधिक कहर ओलावृष्टि का हुआ है। हिमाचल किसान सभा की क्षेत्रीय कमेटी छत्तरी के सचिव बिहारी लाल ने बताया कि सर्दियों में तेज हवाओं के साथ बर्फानी तूफान आने से पहले ही इन पंचायतों में सेब के 50 प्रतिशत से अधिक पौधे टूट कर उखड़ चुके हैं, मगर जो अब बचे भी हैं, उनमें इस बार अच्छी फ्लावरिंग हुई थी और अब सैटिंग का समय था। शनिवार दोपहर को अचानक खराब मौसम के बाद ओलों के साथ बारिश शुरू हुई। इस ओलावृष्टि ने सेब की सारी फ्लावरिंग को तहस-नहस कर दिया और बागवानों की रही सही उम्मीद भी खत्म हो गई। इस ओलावृष्टि का कहर सेब के साथ नाशपाती, मटर, जौ और गेहूं की फसल पर भी पड़ा। बिहारी लाल ने बताया कि इन दो पंचायतों में एक दर्जन से अधिक बड़े बड़े गांव हैं, जिनमें इस ओलावृष्टि ने सबसे अधिक तबाही मचाई है। उन्होंने बताया कि जनवरी में जो बर्फानी तूफान ने सेब के पौधों पर कहर ढाया था। उसका भी मुआवजा सरकार ने बागवानों को नहीं दिया, जबकि बागवानों का करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ है। उन्होंने प्रशासन व सरकार से मांग की है कि वह ओलावृष्टि से हुए नुकसान का जायजा लेने के लिए टीम भेजे तथा इसका मुआवजा किसान बागवानों को दिया जाए।

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