बारह घंटे तड़पने के बाद युवती की मौत

शिमला। आईजीएमसी पर फिर लापरवाही के आरोप लगे हैं। यहां इलाज को पहुंची युवती की मौत हो गई। आरोप हैं कि इसे समय पर उपचार नहीं मिला और उसकी मौत हो गई। तीमारदार मदद के लिए सीनियर डाक्टर को बुलाने की गुहार करते रहे लेकिन उन्हें झिड़कियों के अलावा कुछ नहीं मिला। अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में बारह घंटे दर्द से कराहती लड़की ने आखिर प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल में दम तोड़ दिया। अस्पताल प्रबंधन की घोर लापरवाही ने एक और मासूम की जान ले ली। मौत के बाद सुबह आठ बजे कुछ देर हंगामा भी हुआ। पूनम शर्मा (22) पंचायत पुडग कोटखाई की रहने वाली थी। उसे पेट दर्द और उल्टी की शिकायत थी। हालत बिगड़ती देख परिजन उसे बुधवार शाम सात बजे अस्पताल ले आए। मौके पर चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार दिया, लेकिन पूनम की हालत नहीं सुधरी। परिजन हाथ-पैर जोड़ रहे थे कि हमारी बच्ची को बचा लो, किसी सीनियर डाक्टर को बुलाकर जांच करवाओ लेकिन उन्हें एक ही जवाब मिला। इस वक्त कोई भी सीनियर नहीं आएगा। इसकी हालत ठीक है। रात दो बजे हालत और ज्यादा बिगड़ने लगी तो परिजन डाक्टर को बुलाने के लिए कमरे में गए। आरोप हैं कि डाक्टर वहां सो रहे थे। जब उन्हें मरीज को देखने को कहा गया तो उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया। कहीं से कोई मदद नहीं मिली। पूनम को तिल-तिल मरता देखने के अलावा अभिभावकों के पास कोई दूसरा चारा नहीं था। सुबह सात बजे पूनम ने दम तोड़ दिया। अस्पताल प्रबंधन इस पूरे मामले में खुद को बेकसूर बता रहा है। अफसरी दावा है सभी टेस्ट किए गए जो ठीक निकले, लेकिन इस बात का जवाब देते नहीं बन रहा कि अगर सभी टेस्ट ठीक थे तो अस्पताल के भीतर डाक्टरों की निगरानी में पूनम की कैसे मौत हो गई?

मौत को प्रबंधन जिम्मेदार
पूनम के पिता राजेंद्र शर्मा ठियोग में वन महकमे में कार्यरत है। पूछने पर कहा, क्या बताऊं… सारी रात बेटी दर्द से तड़पती रही। बेटी को किसी भी सीनियर डाक्टर ने देखा तक नहीं। जूनियर डाक्टर यही कहते रहे सब ठीक है। बेटी का हालत बहुत बिगड़ती गई लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। बेटी की मौत का जिम्मेदार अस्पताल प्रबंधन है। लापरवाही पर सरकार को कदम उठाने होंगे।

लाल जोड़े की जगह कफन में विदा
शिमला। पूनम के हाथ अक्तूबर में पीले होने वाले थे। लाल जोड़े की जगह अस्पताल प्रबंधन के कमजोर और लुंजपुंज मैनेजमेंट की वजह से बेटी को कफन में लपेट कर ले जाना पड़ा। मां कांता देवी ने लाडली के लिए सारा सामान जोड़ लिया था। उसकी पसंद के गहने के अलावा जो बेटी को पंसद था, मां ने सब जुटाया। भाग्य को कुछ और ही मंजूर था, बेटी का मृत शरीर देख मां कांता देवी बेसुध हो गई। उन्हें विश्वास ही नहीं हो रहा था कि उनकी लाडली अब इस दुनिया में नहीं है। बस रह-रह कर एक ही बात कह रही थी इसकी शादी है। यही नहीं रही तो इसके लिए जमा किया गया सामान किसको दूं। कोई बड़ा डाक्टर आता तो बेटी की जान बच जाती। आम आदमी की परवाह किसे?
उधर, कांग्रेस के पार्षद सुशांत कपरेट ने कहा कि रात को किसी भी सीनियर डाक्टर ने पूनम को नहीं देखा। सभी आग्रह करते रहे कि उन्हें बुलाओ। जूनियरों से पूनम की बीमारी की नब्ज ही नहीं पकड़ी गई। अगर सीनियर डाक्टर आते तो वह बच जाती। इस मामले में न्याय के लिए अब वे न्यायालय का दरवाजा खटखटाने जा रहे हैं।

रटा-रटाया जवाब, जांच करेंगे
मौत के बाद वही रटा-रटाया जवाब। वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डा. रमेश ने कहा कि पूनम का एक्सरे, अल्ट्रासाउंड और अन्य सभी संबंधित टेस्ट हुए हैं। सभी टेस्ट ठीक निकले। सर्जरी, मेडिसन से संबंधित डाक्टरों ने स्वास्थ्य जांच की है। सब टेस्ट ठीक थे तो मौत कैसे हो गई? इस का जवाब देते हुए डा. रमेश ने कहा कि यह जांच का विषय है। इसकी छानबीन की जाएगी। भविष्य में ऐसा नहीं हो, इसके लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे।

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