
शिमला। हिमाचल में दूध गंगा योजना को जल्द बहाल किया जाएगा। अब इस योजना के तहत नाबार्ड की नई शर्तों पर ही सब्सिडी मिलेगी। इसके लिए 30 फीसदी महिलाओं की भागीदारी को सुनिश्चित किया जाएगा। यह स्कीम 15 जुलाई को सस्पेंड कर दी गई थी।
राज्य पशुपालन विभाग के सूत्रों ने बताया है कि हिमाचल सहित कई प्रदेशों में निलंबित की गई दूध गंगा योजना को बहाल करने के लिए केंद्र सरकार सहमत हो गई है। नाबार्ड अब इस योजना के लिए आवश्यक उपदान देने को तैयार हो गया है। अंतर केवल यह है कि अब इसके तहत उपदान देने की नियमावली में बदलाव किया गया है। जल्द ही नाबार्ड की ओर से बनाई गई गाइडलाइंस हिमाचल सरकार को मिल जाएगी। इसमें प्रमुख व्यवस्था यह की गई है कि अब इस योजना के हर कंपोनेंट में महिलाओं की तीस फीसदी भागीदारी जरूरी होगी। इस योजना में 12 करोड़ रुपये का बजट पशुपालन विभाग के पास अभी बचा हुआ है। जैसे ही यह योजना बहाल हो जाती है। यह धनराशि भी खर्च हो सकेगी।
हिमाचल प्रदेश पशुपालन विभाग के निदेशक डा. केडी रायट ने बताया है कि इस योजना को लेकर दिल्ली में हाल ही में एक बैठक हुई है। इसमें कुछ बातें तय हुई हैं। वह इस बैठक में गए अधिकारियों से फीडबैक ले रहे हैं।
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ब्याजमुक्त ऋण का प्रावधान है इस योजना में
शिमला। केंद्र सरकार इस योजना के लिए डेयरी वेंचर कैपिटल फंड देती है। इसमें ब्याजयुक्त ऋण का प्रावधान रहा है। इसमें 2 से 10 दुधारू पशुओं के लिए 5 लाख, 5 से 20 बछड़ियों के पालन के लिए 4.80 लाख, वर्मी कंपोस्ट के लिए 20 हजार, बड़ी वर्मी कूलर इकाई के लिए 18 लाख, दूध उत्पादों की ढुलाई के लिए 24 लाख, दूध और दूध उत्पादों के शीत भंडारण के लिए 30 लाख रुपये ऋण की व्यवस्था है।
