
बद्दी (सोलन)(निशा) दाखिलों के साथ बीबीएन के निजी स्कूलों में लूट भी शुरू हो गई है। अप्रैल में आरंभ होने वाले नए शैक्षणिक सत्र के लिए निजी स्कूलों के तुगलकी फरमान अभी से जारी होने शुरू हो गए हैं। अभिभावकों को रीएडमिशन में एक हजार, मासिक फीस में 150 रुपये और बस किराया में प्रति छात्र 100 रुपये तक वृद्धि के आदेश अधिकांश स्कूलों ने जारी कर दिए हैं। दाखिले की घड़ी नजदीक आते देख अभिभावकों को चिंताएं बढ़ने लगी हैं।
बीबीएन में करीब दो दर्जन छोटे बड़े निजी स्कूल है। वर्तमान में स्कूलों में वार्षिक परीक्षाएं चल रही है। अप्रैल माह में दाखिले शुरू होंगे। निजी स्कूलों की मनमानी के आगे अभिभावक भी बेबस हैं। एक निजी स्कूल के संचालक आरडी शर्मा ने बताया कि वह सभी स्कूलों से सबसे कम रीएडमिशन, फीस व बस किराया ले रहे है। आठ रुपये डीजल के दाम बढ़ने के बावजूद भी स्कूल प्रबंधन ने एक वर्ष के बाद किराया बढ़ाया है। रीएडमिशन हर स्कूल में ली जाती है। उपायुक्त सोलन मदन चौहान ने कहा कि इसके लिए व्यापक कदम उठाए जाएंगे। उपमंडल प्रशासन को इस संबंध में जल्द निजी स्कूल संचालकों और अभिभावकों की मीटिंग के लिए कहा जाएगा।
इनसेट
निजी स्कूलों पर हो नियंत्रण
लघु उद्योग भारती के अध्यक्ष विनोद खन्ना का कहना है कि निजी स्कूलों का एकाधिकार तभी खत्म हो सकता है, जब सरकार इनका नियंत्रण अपने हाथ में लें। हर वर्ष बढ़ने वाली फीस से अभिभावक परेशान हैं।
हर साल बढ़ोतरी सीमा तय हो
छातीपुरा की त्रिपता देवी का कहना है कि फीस वृद्धि की हर साल सीमा निर्धारित हो। फीस और या बस के किराया आदि में 25 से 50 रुपये तक बढ़ोतरी सही है। लेकिन एकदम इतनी बढ़ोतरी चिंता का विषय है।
सुविधाएं भी बेहतर दी जाएं
मखनू माजरा के तरसेम चौधरी ने कहा कि बच्चों को फीस के हिसाब में सुविधा भी देनी चाहिए। कई स्कूलों में तो खेल मैदान और बेहतर शिक्षक हैं, लेकिन कहीं तो तंग भवनों और गलियों में स्कूल चलाए जा रहे हैं।
जरूरी है अंकुश लगाना
संजीव शर्मा ने कहा कि शिक्षा के व्यापारीकरण पर रोक लगनी चाहिए। स्कूल प्रबंधन जब चाहे फीस बढ़ा देते हैं। कभी सालाना समारोह, कभी अन्य चीजों के लिए भुगतान की चिट थमा देते हैं। अंकुश जरूरी है।
सुरक्षा भी रखते ताक पर
हरिपुर संडोली के प्रधान रामेश्वर ने कहा कि बसों में बच्चों को ठूस-ठूस कर भरा जाता है। पैसे देने के बाद बच्चों की सीट नहीं मिलती है। बच्चों की सुरक्षा को ताक पर है। सख्त कार्रवाई ऐसे स्कूलों पर होनी चाहिए।
