
बरमाणा (बिलासपुर)। बरसात के मौसम में लोगों को सप्लाई हो रहे पानी में मिट्टी और गाद की मात्रा इतनी है कि पानी पीने लायक नहीं रहा। दूषित पानी के सेवन से कई इलाकों में जल जनित रोगों के फैलने का खतरा बढ़ गया है। बरमाणा क्षेत्र के अंतर्गत नैरीजाजर-पंजगाई पेयजल योजना के तहत आने वाली पंजगाई, धौनकोठी, धार टटोह और हरनोड़ा पंचायतों के हजारों लोग इन दिनों दूषित पानी पीने को विवश हो गए हैं। ग्रामीण डायरिया, आंत्रशोथ जैसी गंभीर बीमारी के फैलने की आशंका को लेकर चिंतित हो गए हैं।
ग्रामीण छोटा राम ठाकुर, लेख राम, बाबू राम, कमल सिंह वर्मा, दौलत राम ठाकुर, सोम देवी, शिव राम ठाकुर, रणवीर सिंह सांख्यान, बलवीर सिंह, रमेश कुमार, सुख राम, रविंद्र, राजेंद्र सिंह, निर्मला, विमला, रणजीत ने बताया कि आईपीएच के नलों से मिट्टी व गादयुक्त पानी आ रहा है। पानी जानवरों को तक देने लायक नहीं है। सोलन जिला के प्राकृतिक जल स्रोत में बरसात का पानी मिलने से यह समस्या हुई है। बावजूद इसके विभाग कोई कदम नहीं उठा रहा। पानी को स्वच्छ करने के लिए फिल्टर तक नहीं लगाए गए। कोल बांध निर्माण के दौरान एनटीपीसी ने इस योजना के सुधार तथा विस्तारीकरण के लिए करोड़ों रुपये की धन राशि विभाग को दी है। बावजूद इसके लोगों को दूषित पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। लोगों ने चेतावनी दी है कि जल्द स्वच्छ पानी मुहैया नहीं करवाया तो उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए विवश होना पड़ेगा। उन्होंने विभाग के दफ्तर का घेराव करने की भी चेतावनी दी है। धौन कोठी पंचायत के प्रधान श्याम लाल ठाकुर ने मांग की है कि उनकी पंचायत के गांवों को रोपा-बगौण उठाऊ पेयजल योजना से जोड़ा जाए। उधर, आईपीएच के कनिष्ठ अभियंता आरके शर्मा ने बताया कि जल स्रोत में बरसाती पानी मिलने से ऐसा हुआ है। पानी स्वच्छ हुआ तो फिर छोड़ दिया जाएगा।
