
चंबा। बरसात के शुरुआत के दो दिनों में ही जिला चंबा में आपदा प्रबंधन की पोल खुल कर सामने आ गई है। हर साल जिन जगहों पर घार आने से जिला बाकी राज्य से कट जाता है, वहां जल्द मार्ग बहाली के उपाय नहीं किए जा सके हैं। इस कारण रात को वाहन चालकों को कई घंटे तेज बारिश के बीच खतरनाक स्थिति में रात सड़क पर काटने को विवश होना पड़ता है। जिले के मुख्य मार्गों को कम से कम समय में बहाल करने की कोई व्यवस्था नहीं है। रात को विभाग और प्रशासन मुस्तैद नहीं रहता है। सुबह जब हल्ला मचता है तो मार्ग बहाल करने के उपाय हो पाते हैं।
यात्रियों को पता तक नहीं होता कि रात को किसकी मदद ली जाए। जिले में आपदा प्रबंधन की हेल्पलाइन तो जारी की गई है मगर इनके बोर्ड आज तक प्रमुख मार्गों पर नहीं लग पाए हैं। खासकर उन जगहों पर इन नंबरों के बोर्ड लगाने की जरूरत है, जहां अक्सर मलबा गिरने से रोड बंद हो जाता है। सोमवार रात को चंबा-पठानकोट मार्ग बंद रहने से एक दर्जन के करीब बसें रात भर फंसी रहीं। इनमें ज्यादातर लांग रूट की बसें शामिल थीं। मार्ग बंद रहने से यात्रियों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। चंबा-देहरादून, चंबा-शिमला, चंबा-अमृतसर, चंबा-हरिद्वार, चंबा-पठानकोट, चंबा-शिमला सुपर फास्ट, चंबा-सिहुंता मार्ग पर चलने वाली बसें करीब पांच घंटे देरी से निर्धारित स्थानों पर पहुंच पाईं। इसके अलावा कई निजी वाहनों की भी मार्ग के दोनों तरफ लंबी कतारें लगी रहीं। मार्ग बंद रहने से सैकड़ों यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
सहायता के लिए 1077 पर करें कॉल
उपायुक्त संदीप कदम ने कहा कि आपदा प्रबंधन के लिए टोल फ्री नंबर जारी किया गया है। अगर किसी प्रकार की मदद की जरूरत हो तो 1077 नंबर पर सूचित किया जा सकता है। जिले के मार्गों पर मलबा गिरने के कारण रात को इसे हटाने में दिक्कत पेश आती है। अंधेरे में मलबा गिरने वाली जगह पर नजर नहीं रखी जा सकती। इस कारण जेसीबी आपरेटर रिस्क नहीं लेते। दिन की रोशनी में ही मलबा हट पाता है।
