
शिलाई (सिरमौर)। खनन के मलबे से खड्डों में हो रहे कटाव के कारण बरसात का मौसम आते ही शमाह एवं छछेती गांव के ग्रामीणों की नींद उड़ जाती है। दोनों गांव के समीप जमीन में दरारें पड़ गई हैं और प्रचीन जल स्त्रोत भी सूख रहे हैं। ग्रामीण इसका मुख्य कारण खनन का मलबा अवैज्ञानिक ढंग से खड्डों में फेंकना बता रहे हैं। बरसात आते ही मलबे ने इतना कटाव कर डाला कि दोनों गांव के नीचे दरारें पड़ गई हैं।
ग्राम पंचायत शावगा का गांव शमाह तथा ग्राम पचायत बनौर के गांव छछेती में प्रति वर्ष कटाव से हो रहे भूस्खलन से सैकड़ों बीघा उपजाऊ भूमि कटाव की भेंट चढ़ गई है। रिहायशी मकानों के समीप दरारें पड़ गई हैं। शमाह गांव का भी यही हाल है। चार वर्ष से इस गांव के नीचे दरारें पड़ी हुई हैं, कई बार प्रशासन के अधिकारी मौके पर गए लेकिन हुआ कुछ नहीं। ग्रामीण दया राम, मायाराम, रतिराम, अमर सिंह का कहना है कि इसका मुख्य कारण खनन के मलबे को अवैज्ञानिक ढंग से खड्डों में फेंकने से बरसात के मौसम में मलबे ने कटाव का दायरा बढ़ा लिया है।
हर साल भूमि कटाव बढ़ता ही जा रहा है और गांवों के नीचे दरारें चौड़ी होती जा रही हैं। बाढ़ का उफान मलबे बढ़कर कई गुना हो जाता है और कटाव में हर साल उपजाऊ भूमि कटती ही जा रही है। पहाड़ों एवं खड्डों में आज भी बेरोकटोक मलबा डाला जा रहा है। जल स्तर भी घट रहा है। ग्रामीणों ने मांग की है कि खड्डों मे कटाव रोकने के लिए चेकडैम लगाए जाएं, पौध रोपण किया जाए और मलबा फेंकने पर प्रतिबंध लगाया जाए।
