
पौड़ी। पौड़ी जिले में थलीसैण प्रखंड का बनास गांव भी भूस्खलन के लिए संवेदनशील बन गया है। नागधार गदेरे से हो रहे भूकटाव से गांव के तीन मकान तो खतरे की जद में आए हुए हैं। ज्यादा बारिश होेने पर गांव के कई अन्य मकानों को भी खतरा हो सकता है।
पैठाणी-बड़ेथ मार्ग में सड़क से दाहिनी तरफ सड़क के ऊपर बसा बनास गांव पैठाणी कस्बे से चार किलोमीटर दूर है। गांव में करीब 70 परिवार रह रहे हैं। एक सप्ताह से गांव में रह रहे सभी लोगों की नींद उड़ी हुई है। 14 जुलाई को सुबह इस गांव से ठीक नीचे से नागधार गदेरे के पानी से भूकटाव शुरू हो गया।
गांव के नीचे पड़ने वाले पैठाणी-बडेथ मोटर मार्ग में करीब 100 मीटर सड़क का आधा हिस्सा गदेरे में समा गया। सड़क के साथ-साथ गांव से कुछ दूर स्थित खेतों में दरारें आ गई हैं। गांव में तीन मकान खतरे की जद में आ गए हैं। इन भवनों में रह रहे छह परिवारों को प्रशासन द्वारा दूसरी जगह शिफ्ट भी किया हुआ है। लेकिन ज्यादा बरसात होने पर पूरे गांव को खतरा होने की आशंका बनी है।
ग्रामीण बताते हैं कि एक सप्ताह पहले हुए भूस्खलन के बाद अब जैसे ही तेज बरसात होती है। सुरक्षा को लेकर उनकी चिंताएं बढ़ने लगती हैं। हालांकि अभी गांव के तीन मकान खतरे की जद में हैं। लेकिन ज्यादा बरसात हुई तो अन्य घरों को खतरा बन सकता है। अधिकारी भी इस बात को स्वीकारते हैं।
‘बनास गांव में अभी तीन भवन खतरे की जद में हैं। इनमें रह रहे छह परिवारों को दूसरी जगह शिफ्ट किया जा चुका है। बरसात ज्यादा होने पर इस गांव के अन्य मकानों को भी खतरा हो सकता है। वर्तमान में यह गांव भी भूस्खलन की दृष्टि से संवेदनशील बन गया है। मौजूदा स्थितियों को देखते हुए पीएमजीएसवाई विभाग पैठाणी बड़ेथ मार्ग में गांव की तरफ किसी तरह का कटान न करने को निर्देशित किया गया है।’ – जीआर बिनवाल, उपजिलाधिकारी थलीसैण
‘बनास गांव नागधार गदेरे से काफी ऊंचाई में है। 14 जुलाई को नागधार गदेरे से हुए भूस्खलन के बाद से ग्रामीण परेशान हैं। ज्यादा बरसात हुई तो अन्य मकानों को भी खतरा बन सकता है। शासन प्रशासन को इस मामले को गंभीरता से लेना चाहिए।’ – दलीप लाल, ग्राम पंचायत प्रधान बनास तहसील थलीसैण
