
सितारगंज। सितारगंज सिडकुल में स्थापित स्पाइसेस पार्क किसानों के लिए वरदान साबित होगा। पार्क के प्लांटों में परिष्कृत व पैकेजिंग के बाद अदरक, हल्दी, लहसुन और प्याज के उत्पादों का विदेशों में निर्यात किया जाएगा और यहां निजी उद्योग भी निवेश करेंगे। तराई इलाके में मुख्य खेती गन्ना, धान और गेहूं के साथ ही अब अदरक, हल्दी, लहसुन और प्याज की खेती भी बहुतायत में हो सकेगी। किसान अपनी अदरक, हल्दी, लहसुन और प्याज का आसानी से विपणन कर सकेंगे। यही नहीं, पार्क में लगने वाले प्लांटों में सीधे तौर पर किसानों के जुड़ने से बिचौलियों की भूमिका तो खत्म होगी ही अतिरिक्त आय के साधन भी उपलब्ध होंगे। हल्दी की खेती को बढ़ावा देने के लिए पंतनगर विश्वविद्यालय उत्तम किस्म के बीज उपलब्ध कराएगा।
200 करोड़ की लागत से स्पाइसेस पार्क की स्थापना होगी। सिडकुल की पांच एकड़ भूमि में बनने वाले स्पाइसेस पार्क में मसाले के प्लांट लगेंगे। जिनमें अदरक, हल्दी, लहसुन और प्याज को परिष्कृत व पैकेजिंग कर पेस्ट और पाउडर का उत्पादन किया जाएगा। उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों व ऊधम सिंह नगर जनपद के बाजपुर, जसपुर और काशीपुर के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बहुतायत में पैदा होने वाली अदरक को अब किसान औन पौने दामों में नहीं बेचेंगे। किसानों को उनकी अदरक का स्पाइसेस पार्क में सही दाम मिलेगा।
उद्यान प्रभारी त्रिभुवन चंद्र जोशी ने बताया कि इस पार्क के निर्माण में केंद्रीय स्पाइसेस बोर्ड तकनीकी सहायता व सलाह मुहैय्या कराएगा और प्लांट सरकारी उपक्रम के तहत पीपीपी मोड में संचालित होंगे। जिसमें निजी उद्योग भी निवेश करेंगे। बताया कि हल्दी का पुराना बीज बोने से गुणवत्ता निमभन और पैदावार कम होती है। उद्यान विभाग द्वारा किसानों को रंग में बेहतर और खुशबूदार हल्दी के लिए पंतनगर विश्वविद्यालय द्वारा तैयार पंतपिताव व स्वर्णा प्रजाति का बीज उपलब्ध कराया जाएगा।
