
हमीरपुर

हिमाचल के जिला प्रशासन हमीरपुर और स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। मुंबई से लौटने के बाद भोरंज के ढुंगरी में संस्थागत क्वारंटीन 15 लोगों को बुधवार दोपहर बाद 4 बजे को यह कहकर घर भेज दिया कि उनकी कोरोना रिपोर्ट निगेटिव है। जबकि उनकी रिपोर्ट देर रात आई। यह सब अधिकारियों की लापरवाही, रिपोर्ट ढंग से न पढ़ने से हुआ।
जब शिमला से उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई तो प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। जैसे ही उपायुक्त हमीरपुर को इसकी जानकारी लगी जो उन्होंने सीएमओ समेत जिले के तमाम एसडीएम को फोन किया। आनन-फानन में देर रात को ही सभी 15 लोगों को एंबुलेंस में डालकर कोविड सेंटर हमीरपुर शिफ्ट किया। यह सिलसिला देर रात करीब 3 बजे तक चलता रहा। उधर, एसीएस हेल्थ आरडी धीमान ने जिला प्रशासन ने पूरे मामले की रिपोर्ट मांग ली है।
गुरुवार सुबह उपायुक्त हमीरपुर ने इस मामले पर जांच बिठाई और सीएमओ को जांच रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा। इसके साथ ही स्वास्थ्य महकमे ने भी जांच शुरू कर दी है। वीरवार सुबह पत्रकार वार्ता में उपायुक्त हमीरपुर हरिकेश मीणा ने बताया कि 18 और 19 मई को मुंबई से श्रमिक ट्रेन में हमीरपुर के 167 लोग आए, जिन्हें जवाहर नवोदय विद्यालय डुंगरी में संस्थागत क्वारंटीन किया।
19 मई को सभी के सैंपल लिए। 21 मई को पहली रिपोर्ट आई, जिसमें 31 पॉजिटिव आए, जबकि 136 निगेटिव निकले। निगेटिव को भी घर नहीं भेजा ताकि दोबारा सैंपल ले सकें। जिनकी पहले रिपोर्ट निगेटिव आई थी, उनके समेत कुल 176 सैंपल 24 व 25 मई को दोबारा पालमपुर और शिमला भेजे। अगले दिन 122 की रिपोर्ट आई, जिनमें 7 पॉजिटिव निकले।
अन्य सैंपल की रिपोर्ट पैंडिंग थी। इसमें बड़ी बात यह थी कि जिनकी रिपोर्ट पहले निगेटिव थी, वे भी पॉजिटिव निकले। शेष की 26 मई को रिपोर्ट निगेटिव आई। इसके बाद दियोटसिद्ध, हमीरपुर और जेएनवी में रखे 115 लोगों में 43 लोग घर भेज दिए, लेकिन वार्तालाप में कमी से इनमें 15 लोग पॉजिटिव थे। उपायुक्त ने कहा कि इस मामले कहां चूक हुई, इसकी जांच की जाएगी।
