बच्चों को एनीमिया मुक्त करने के दावे हवा

डरोह (कांगड़ा)। जिला कांगड़ा में छात्रों को एनीमिया मुक्त करने के सरकार के दावे हवा हो गए हैं। दरअसल जिला में विफ्स योजना हांफनी शुरू हो गई है। अप्रैल 2013 से इस योजना को पूरे प्रदेश में लागू किया जाना था।
पहले स्वास्थ्य विभाग ने योजना को मंडी और बिलासपुर में शुरू किया। योजना के तहत सरकारी स्कूलों में छठी से बारहवीं तक पढ़ाई कर रहे छात्रों को अध्यापकों ने हर बुधवार को आयरन की गोली खिलाई। दवाइयों का विपरीत असर होने के कारण दवाइयों का स्टाक वापस मंगवाया गया था। इसके बाद अभी तक दवाइयाें की खेप नहीं पहुंच पाई है। योजना के तहत खंड स्तर पर एसएसए के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग ने सभी स्कूलों के प्रमुखों और अध्यापकों को ट्रेनिंग पर लाखों रुपए भी खर्च दिया है। दवाइयों की खरीदारी के लिए राजस्थान की एक कंपनी के साथ स्वास्थ्य विभाग के साथ करार हुआ था। दवाइयों में गुणवत्ता सही न होने के कारण खेप को वापस भेजा गया। उसके बाद अभी तक स्वास्थ्य विभाग के गोदामों में दवाइयां नहीं पहुंच पाई हैं। योजना से ऐसे बच्चों को लाभ मिलना था, जो कमजोर हैं।

कंपनी से किया जा रहा संपर्क
सीएमओ डा. डीएस गुरुंग ने कहा कि राजस्थान की एक कंपनी के माध्यम से दवाइयां मंगवाई गईं थीं। कंपनी के लाइसेंस में खामियां पाई गईं। कंपनी ने अभी तक दवाइयां नहीं भेजी हैं। इस कारण आयरन की गोलियां बच्चाें को नहीं खिलाई जा रही हैं। दवाइयों की खेप आने के बाद स्कूलों को दवाइयां भेज दी जाएंगी। इस बारे में संबंधित कंपनी से संपर्क किया जा रहा है।

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