
ज्यूरी (रामपुर बुशहर)। एक ओर मौसम की मार, ऊपर से बंदरों का बढ़ते आतंक ने बागवानों को बैकफुट पर ला खड़ा कर दिया है। सराहन के बागवान अब अपनी बची हुई सेब की फसल को बंदरों से बचाने के लिए मशक्कत कर रहे हैं। कुछ दिन पूर्व हुई बारिश से गिरे तापमान के चलते सराहन के निचले क्षेत्रों में सेब की फसल की पैदावार प्रभावित हुई है। वहीं, क्षेत्र के ऊंचाई वाले स्थानों में अच्छी फ्लावरिंग तो हुई है, लेकिन उत्पाती बंदरों ने फल लगने से पहले ही फूलों और कलियाें को नष्ट कर दिया। ऐसे में बागवानों को सुबह पांच बजे से लेकर शाम के अंधेरे तक बगीचों की निगरानी करने को मजबूर होना पड़ रहा है। हालात इस कदर बिगड़ गए हैं कि बंदरों के आतंक से जानवर तो दूर इंसानों को भी डर के साये में जीना पड़ रहा है। इन बंदरों को बगीचों से खदेड़ना भी जान को जोखिम में डालने जैसा है। क्षेत्र के बागवानों राकेश, कांता नेगी, विद्या देवी, हिम्मत सिंह, दिवान सिंह, मंगल दास, विजय सिंह, गीता दत्त, राजकुमार, राम नाथ, योगेश कुमार, आगर दास और दीप राम का कहना है कि क्षेत्र के बागवान पहले ही मौसम की मार झेल रहे हैं। उस पर बंदर फसल को पूरी तरह नुकसान पहुंचा रहे हैं। बागवानों ने बताया कि सेब की अच्छी पैदावार के लिए वे पूरे वर्ष भर जी तोड़ मेहनत करते हैं। सेब की आमदन से वर्ष भर का गुजारा होता है। उन्होंने सरकार से बंदरों को पकड़ कर दूसरी जगह छोड़ने की मांग की है।
क्या कहना है विभाग का
डीएफओ रामपुर अमित शर्मा का कहना है कि सरकार ने बंदरों को पकड़ने के लिए विशेष टीम का गठन किया है। इसके तहत एक बंदर को पकड़ने पर पांच सौ रुपये दिए जा रहे हैं। उन्होंने लोगों से बंदरों को पकड़ने की पहल करने की अपील की कि लोग भी बंदरों को पकड़ने के लिए आगे आएं और विभाग द्वारा उन्हें पिंजरा और सहयोग भी दिया जाएगा।
