बंजर हुई निरमंड की 10 हेक्टेयर भूमि

निरमंड (रामपुर)।(संदीप वर्मा) बागीपुल से अवेरा तक बनी तीसरे चरण की नहर का सात साल बाद भी उद्घाटन नहीं हो पाया है। इस कारण निरमंड और बावा दो पंचायतों के करीब सात गांवों के किसानों को सिंचाई सुविधा नहीं मिल पा रही है। वहीं, क्षेत्र की करीब 10 हजार हेक्टेयर भूमि बंजर हो गई है। आईपीएच ने इस नहर को बनाने में एक करोड़ छह लाख रुपये की राशि खर्च की है। नहर का निर्माण कार्य सात साल पहले पूरा हो चुका है। मगर इसके उद्घाटन के लिए किसी भी सरकार ने दिलचस्पी नहीं दिखाई है। नहर से लाभान्वित होने वाले गांवों सतांगीधार, खुबु, अवेरा, पीपलधार, ओडीधार, शीशवी और बाग किसानों पवन कुमार, सोनू, पुष्पेंद्र कुमार, महेंद्र सिंह, घनश्याम, हुकम लाल, जितेंद्र कुमार, पींकू, टेक चंद, देवेश्वर, यौवल, दुनी चंद, विनोद, रोशन और दिले राम का कहना है कि उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री, सिंचाई मंत्री, आईपीएच विभाग और पंचायत प्रधान से नहर का उद्घाटन कर क्षेत्र के लोगों को पानी मुहैया करवाने की मांग की है, लेकिन आज तक कोई भी सरकार किसानों के प्रति गंभीर नजर नहीं आई। इस कारण यहां के किसानों की लगभग 10 हजार हेक्टेयर जमीन बंजर बन गई है।
खेतीबाड़ी से वंचित युवा वर्ग बेरोजगारी से जूझ रहा है। नहर के तीसरे चरण का शिलान्यास उस समय के कांग्रेस विधायक ईश्वर दास ने किया था, जिसका आज तक उद्घाटन नहीं हो पाया है। भाजपा शासनकाल में भी इस नहर को अनदेखा ही किया गया। हालांकि सीटू या हिमाचल किसान सभा किसानों के हक की बात करती हैं, लेकिन वास्तविकता में इन्होंने भी इन गांव के किसानों के लिए कुछ खास कदम नहीं उठाए। इस संबंध में आईपीएच आनी के एक्सईएन रंजीत चौधरी ने बताया कि चरण एक और दो का काम चल रहा है। इस कारण किसानों को सुविधा नहीं मिल रही है। काम पूरा होने के बाद किसानाें को सिंचाई सुविधा मिल जाएगी।

Related posts