फोन टैपिंग केस: आईएएस के बाद अब आईपीएस की बारी

शिमला  (वीरेन्द्र खागटा)

जांच पूरी, दो पूर्व डीजीपी बनाए जा सकते हैं आरोपी

जांच पूरी, दो पूर्व डीजीपी बनाए जा सकते हैं आरोपी

एचपीसीए केस में चार आईएएस अफसरों को जांच के दायरे में लेने के बाद अब कुछ आईपीएस अफसरों पर शिकंजा कसने वाला है।

विजिलेंस ने बहुचर्चित फोन टैपिंग केस में जांच पूरी कर ली है। इस केस की एफआईआर 26 जून 2013 को दर्ज हुई थी, जिसमें किसी का नाम नहीं था।

सूत्र बता रहे हैं कि पूर्व डीजीपी डा. डीएस मन्हास और आईडी भंडारी का नाम चार्जशीट में आ सकता है। मन्हास रिटायर हो चुके हैं, जबकि भंडारी भी इसी महीने रिटायर हो रहे हैं।पूर्व डीजीपी को बनाया जाएगा गवाह

पूर्व डीजीपी को बनाया जाएगा गवाह

उनके अलावा इंस्पेक्टर या इससे निचले रैंक के दो पुलिस जवानों और मोबाइल कंपनियों के नोडल अधिकारियों को भी चार्जशीट में शामिल किया जाएगा।

गृह विभाग के प्रधान सचिव पीसी धीमान का नाम इसमें आएगा या नहीं? यह अभी तय नहीं है। पूर्व डीजीपी बी. कमल कुमार को गवाह के तौर पर शामिल किया जा रहा है।

इस केस में अब तक कुल 35 लोगों से विजिलेंस पूछताछ कर चुकी है। आईजी अरविंद शारदा ने बताया कि मामले की जांच अंतिम चरण में है। इसमें कितने आरोपी बनेंगे, ये ड्राफ्ट चार्जशीट से पता चलेगा।

पूर्व सरकार पर है आरोप

पूर्व सरकार पर है आरोप

इस केस में पूर्व भाजपा सरकार अवैध फोन टैपिंग करवाने के आरोप हैं। 24 दिसंबर 2012 को मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के शपथ लेने की पिछली रात को सरकार ने सीआईडी के टेकिभनकल सेल से कंप्यूटर और अन्य रिकार्ड जब्त किया था।

इसे जुन्गा फोरेंसिक लैब भेजा गया। लैब ने रिपोर्ट दी कि कंप्यूटर हार्ड डिस्क, सीडी और पैन ड्राइव फोन टैपिंग की रिकार्डिंग है।

सरकार ने दावा किया था कि गृह विभाग की फाइलों से इस डाटा को जब मिलाया गया तो कई मोबाइल नंबर ऐसे पाए गए, जिन्हें टैप करने की मंजूरी नहीं दी गई थी।

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