फैब्रिक हटों में नया अवतार लेगा कुंवारी गांव

बागेश्वर। उच्च हिमालय क्षेत्र में आपदा के कारण तबाह हुए कुंवारी गांव का सैकड़ों साल पुराना अस्तित्व शायद कुछ समय बाद खत्म हो जाएगा। ग्रामीणों की मांग के अनुसार उन्हें भूमि और भवनों का मुआवजा मिला तो मकान और उसकी भूमि सरकार के पास चली जाएगी। इसके बाद किसी दूसरे स्थान पर कुंवारी गांव आधुनिक फैब्रिक हटों के रूप में आकार ले लेगा।
64 परिवारों का कुंवारी गांव उच्च हिमालय के उन गांवों में शामिल है, जहां सामान्य दिनों में भी आसानी के साथ नहीं पहुंचा जा सकता। तकरीबन सात सौ साल पुराने इस गांव में इस वक्त 64 परिवार रहते हैं। जून के महीने आई आपदा में पूरा गांव तबाह हो गया, भूमि में दरारें हैं और मकान रहने लायक नहीं हैं। यहां के लोग तंबुओं और क्षतिग्रस्त घरों में ही रह रहे हैं। सरकार ने विस्थापन के लिए इस गांव को भी चुना है। सभी परिवारों के लिए एक स्थान पर फैब्रिक हटें बनाने की योजना है। सरकार की इस पुनर्वास नीति में विकल्प यह भी है कि ग्रामीण चाहें तो परंपरागत मकान भी बना सकते हैं और अपनी दिक्कतें बता सकते हैं। नए स्थान पर भूमि और आवास लेने वालों को अपना पुराना मकान और भूमि सरकार के नाम करनी होगी। कुंवारी के सभी ग्रामीणों का कहना है कि तबाह हो चुकी भूमि और भवन सरकार को देकर वह फैब्रिक कालोनी में जाने को तैयार हैं। वहां गौशाले बनाने के लिए धन की आवश्यकता है। फैब्रिक हटें बनने तक उन्हें किराए के मद में प्रति व्यक्ति तीन हजार रुपये और भवन क्षति के दो लाख रुपये दिए जाएं। ग्रामीणों ने इस संबंध में सरकार को सामूहिक पत्र भेज दिया है।

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