
मोहाली। पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (पीएसईबी) के फर्जी सर्टिफिकेट बनानकर सरकारी नौकरियां हासिल करने वालों की अब खैर नहीं है। इस समस्या से निपटने के लिए पीएसईबी ने कई नई तकनीकों पर काम शुरू किया है। इसके तहत एक तो विद्यार्थियों को सर्टिफिकेट डिजिटल लॉकर पर मुहैया करवाए जा रहे हैं। साथ ही सर्टिफिकेटों के लिए ऑनलाइन सत्यापन प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसमें कोई भी संस्थान दुनिया के किसी भी कोने से सर्टिफिकेटों का सत्यापन करवा पाएंगे। इतना ही नहीं अगर व्यक्ति का सर्टिफिकेट फर्जी पाया जाता है तो बोर्ड द्वारा उसे अपने रिकॉर्ड में ब्लैकलिस्ट कर दिया जाता है। साथ ही उसका विवरण वेबसाइट पर अपलोड कर दिया जाता है।
पीएसईबी की दसवीं और 12वीं कक्षा में हर साल सात लाख विद्यार्थी अपीयर होते हैं। ऐसे में कई छात्र नौकरी हासिल करने या उच्च शिक्षा के लिए नामी शिक्षण संस्थानों में जाते हैं। हर महीने दो हजार से अधिक सर्टिफिकेट सत्यापन के लिए पीएसईबी में आते हैं। जनवरी से लेकर मई महीने तक नौ सर्टिफिकेट फर्जी भी पकड़े गए थे। हालांकि जाली सर्टिफिकेटों पर नकेल कसने के लिए बोर्ड करीब चार साल से काम कर रहा है। सर्टिफिकेटों में कई स्तर पर बदलाव किए गए। इसके बाद डीजी लॉकर शुरू कया। इसके बाद अब ऑनलाइन सत्यापन प्रक्रिया शुरू की गई। यह प्रक्रिया इतनी मजबूत व पारदर्शी बनाई गई है कि व्यक्ति ऑनलाइन देख पाएंगे।
बोर्ड के चेयरमैन प्रो. योगराज ने बताया कि उनकी कोशिश है कि बोर्ड को बदलती दुनिया के साथ अपडेट किया जाए। साथ ही लोगों को सारी सुविधाएं ऑनलाइन मुहैया करवाई जाए ताकि किसी भी तरह की दिक्कत लोगों को न उठानी पड़े।
सेना से लेकर रेलवे तक में प्रयोग किए गए फर्जी सर्टिफिकेट
पीएसईबी के फर्जी दस्तावेजो को रेलवे से लेकर सेना तक में नौकरी हासिल करने में प्रयोग किया गया। इसके अलावा पंजाबी यूनिवर्सिटी, पासपोर्ट ऑफिस, पंजाब पुलिस व राजस्व विभाग में भी फर्जी दस्तावेजों के सहारे नौकरी हासिल करने में कुछ युवा कामयाब रहे हैं। जब उक्त लोगों के सर्टिफिकेट पीएसईबी पहुंचे तो उनकी पोल खुल गई। इसके बाद पीएसईबी ने उक्त लोगों को अपने रिकॉर्ड में ब्लैकलिस्ट कर दिया है। साथ ही संबंधित विभागों के अधिकारियों को इस संबंधी आगे की कार्रवाई के लिए सूचित कर दिया है।
फर्जी दस्तावेजों से नौकरी हासिल करने में लड़कियां भी आगे
फर्जी दस्तावेज तैयार कर नौकरियां हासिल करने में लड़कियां भी आगे रहती हैं। पिछले कुछ समय में कई संस्थानों से लड़कियों के सर्टिफिकेट सत्यापन में फर्जी पाए गए हैं। इसमें अधिकतर सर्टिफिकेट दसवीं और 12वीं कक्षा के थे। इसके अलावा बोर्ड ने अपना इंटरनल सिस्टम भी मजबूत किया है।
