
शिमला। बालिका आश्रम सुन्नी से कथित मौसी के साथ गायब हुई दो बच्चियों का कोई सुराग नहीं लग पाया है। मौसी ने जो मोबाइल नंबर दिया था, वह फर्जी निकला है। इन बेसहारा बच्चों की पढ़ाई यहां पर होती है, उसके बाद इन्हें मशोबरा बालिका आश्रम में शिफ्ट कर दिया जाता है। सुरक्षा के नाम पर यहां कुछ नहीं है। सुरक्षा कर्मी तो दूर, वार्डन तक नहीं है। यहां वार्डन का जिम्मा रसोइए को दिया गया है। महकमे की ओर से जांच के आदेश दे दिए गए हैं और मंगलवार को रिपोर्ट आ जाएगी। जांच अफसर सोमवार को सुन्नी पहुंचे।
सुन्नी बाल आश्रम में एक महिला के हाथों दूसरी कक्षा में पढ़ने वाली दो बच्चियों को सौंप दिया गया है। पुलिस ने अज्ञात महिला के खिलाफ अपहरण का मुकदमा कायम किया है। रविवार दोपहर करीब 12:00 बजे सुन्नी बालिका आश्रम में एक महिला आई, उसने खुद को इन बच्चियों की मौसी बताया। आश्रम के कर्मचारी से कहा कि वह इन्हें नए कपड़े सिलवाने के लिए अपने साथ ले जाना चाहती है। जल्द ही कपड़ों का नाप लेकर इन्हें वापस आश्रम में छोड़ देगी लेकिन जब शाम पांच बजे तक बच्चियां वापस नहीं आईं तो पुलिस को सूचना दी गई।
चाइल्ड वेलफेयर की सचिव रितू सेठी ने कहा कि जांच के आदेश दे दिए गए हैं। जो महिला बच्चों को ले गई है, अभिभावक के तौर पर उसकी एंट्री है। बाकायदा महिला का फोटो भी लगा है। वार्डन अभी वहां नहीं है। जो थीं, वह सेवानिवृत्त हो चुकी हैं। जल्द ही महिला स्टाफ की नियुक्ति की जा रही है। उधर, डीएसपी सिटी पंकज शर्मा ने कहा कि वह मंगलवार को मौके पर गए थे। मामले की जांच चल रही है।
