
चंबा। सांसद राजन सुशांत की अध्यक्षता में आयोजित लाडा की बैठक में तीसा के तरेला स्थित गिन्नी ग्लोबल प्रोजेक्ट के प्रभावितों का गुस्सा जमकर फूटा। इस दौरान डा. चुगानी ने सांसद को बताया कि इस प्रोजेक्ट की मनमानी के चलते प्रभावित ग्रामीण गुलामों जैसा जीवन जी रहे हैं। उन्होंने कहा कि जहां प्रोजेक्ट प्रबंधन अपने धन-बल पर ग्रामीणों की आवाज को दबाता आ रहा है, वहीं प्रशासन भी बहरा बनकर उनकी बात को नहीं सुन रहा। उन्होंने बताया कि प्रोजेक्ट प्रबंधन के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि तय नियमानुसार 15 फीसदी पानी भी खड्डों में नहीं छोड़ा जा रहा है। इससे खड्डों के किनारे बने शमशानघाटों पर अंतिम संस्कार करना मुश्किल हो गया है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र की सड़कों व पुलों की बुरी हालत है। यहां इस परियोजना के अलावा तीन और परियोजनाएं होने के बावजूद यहां के ग्रामीण बच्चों को आठ किमी पैदल खस्ताहाल रास्ता लांघ कर स्कूल जाना पड़ता है। इतना ही नहीं, यहां का पुल भी खस्ताहाल हो चुका है। इसे ठीक करवाने को लेकर न तो कंपनी रुचि दिखा रही है और न ही प्रशासन कुछ कर रहा है। लाडा की धनराशि कहां खर्च हो रही है, ग्रामीणों को इसका पता नहीं। प्रभावित योगराज धीमान ने बताया कि इस कंपनी ने सरकार और फारेस्ट विभाग की इजाजत के बिना ही एक सुरंग भी बना डाली है। इससे आधा दर्जन घरों को खतरा पैरा हो गया है। उन्होंने बताया कि जब आरटीआई के तहत वन विभाग से जानकारी मांगी गई तो अधिकारियों ने बताया कि इसकी जानकारी विभाग को नहीं है। इसमें विभाग की मिलीभगत भी सामने आ रही है। उन्होंने बताया कि इसके अलावा प्रोजेक्ट ने वन विभाग की कई बीघा भूमि पर अवैध कब्जा कर रखा है। इस पर विभाग कार्रवाई नहीं कर रहा। इस प्रोजेक्ट के कारण अपना दो मंजिला घर व बगीचा गंवा चुके राकेश महाजन ने भी आपबीती सुनाते हुए कंपनी पर मुआवजा न देने का आरोप जड़ा है। इन लोगों ने बताया कि प्रशासन उनकी बात सुनता नहीं। जब वे आंदोलन करते हैं तो कंपनी उन्हें दबाने के लिए पुलिस जरूर भेज देती है। कंपनी की लाइन से करंट की चपेट में आए जयराम ने भी सांसद को ज्ञापन सौंपा और कंठूराम ने अपने तीन घराट प्रोजेक्ट की भेट चढ़ने की शिकायत की। इस पर सांसद ने कड़ा रुख अपनाते हुए अधिकारियों को प्रोजेक्ट की जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि अगर इन प्रोजेक्टों से आम जनता इसी तरह पीसेगी तो इस विकास का क्या फायदा होगा।
