
चंबा। राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान में प्राइवेट पेपर देने पर रोक के निर्णय से सैकड़ों युवाओं का शिक्षा का सपना चकनाचूर हो जाएगा। घर बैठे मात्र 100 रुपये फीस देकर स्नातक करने वालों को अब यह सुविधा नहीं मिलेगी। जिला चंबा की बात करें तो दुर्गम क्षेत्रों और गरीब परिवारों से संबंध रखने वाली सैकड़ों लड़कियां प्राइवेट पेपर देकर स्नातक करने का सपना संजोए हुए हैं। अब तक कई छात्राएं प्राइवेट पेपर देकर घर बैठे ग्रेजुएशन कर चुकी हैं। इसमें लड़कों की संख्या भी कम नहीं है। अगर शैक्षणिक सत्र में प्राइवेट पेपर देने पर पूर्ण रूप से रोक लग जाती है तो प्राइवेट पेपर देकर स्नातक करने की उम्मीद पाले युवाओं को इकडोल से पेपर देने पड़ेंगे। इसके लिए उन्हें इकडोल में भारी भरकम फीस अदा करनी पड़ेगी। इसका सबसे ज्यादा असर गरीब तबके के विद्यार्थियों पर पड़ेगा। विवि प्रशासन के इस निर्णय का छात्र संगठनों ने विरोध किया है। छात्र संगठनों ने चेतावनी दी है कि जल्द इस निर्णय को रद किया जाए। एबीवीपी के परिसर अध्यक्ष भुवनेश भारद्वाज ने विवि के इस निर्णय को सरासर गलत ठहराया है। उन्होंने बताया कि इससे गरीब परिवार के छात्रों को दिक्कतें पेश आएंगी।
एसएफआई के जिला सचिव विजय राठौर और हेम राज का कहना है कि इस निर्णय के लागू होने से घर बैठे प्राइवेट स्नातक करने वालों की उम्मीदों पर पानी फिर जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रदेश में अधिकतर छात्राएं प्राइवेट पेपर देकर ग्रेजुएशन करती हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि विवि पुरानी प्रणाली को खत्म कर शिक्षा को पैसा कमाने का जरिया बनाने में तुला हुआ है। विजय राठौर ने कहा कि इकडोल में दो हजार से ज्यादा फीस छात्रों को अदा करनी पड़ती है। उधर,एनएसयूआई के परिसर अध्यक्ष चंदन नरूला का कहना है कि प्राइवेट पेपर देने पर रोक लगाने से गरीब छात्रों के साथ अन्याय होगा। विवि प्रशासन को अपने निर्णय पर पुनर्विचार करना होगा। अन्यथा एनएसयूआई आंदोलन करने से भी गुरेज नहीं करेगी।
