प्रशिक्षण न संसाधन बना दी रेस्क्यू टीम

हल्द्वानी। पुलिस की रेस्क्यू टीम के जवानों को आपदा के दौरान लोगों को बचाने का प्रशिक्षण नहीं मिला है, तभी बृहस्पतिवार को रेस्क्यू टीम के जवान नदी में कूदने की हिम्मत नहीं जुटा सके। लाइफ जैकेट पहनने के बावजूद जवान मूकदर्शक बने रहे। रस्सी, लाइफ जैकेट और सीढ़ी के सहारे पुलिस कर्मी मौके पर पहुंचे थे। जवानों की आंखों के सामने बालक बहता जा रहा था, लेकिन वे पानी में नहीं उतर सके। इसकी प्रमुख वजह जवानों को आपदा का प्रशिक्षण न मिलना और अपर्याप्त संसाधन होना था।
बारिश के मौसम में आपदा प्रभावित क्षेत्रों में थाना स्तर पर पुलिस की नाम के लिए रेस्क्यू कई टीमें बनाई जाती हैं। पुलिस की रेस्क्यू टीमों के पास न आपदा से लड़ने के पर्याप्त संसाधन हैं और न उन्हें आपदा का प्रशिक्षण ही दिया गया है। एक पुलिस कर्मी ने बीते दिन ही बताया कि उसे तीन साल पूर्व आपदा का प्रशिक्षण मिला था, इन सालों में वह सब भूल गया। उसी तरह रेस्क्यू टीम के जवानों का हाल है। जवान दिनभर वर्दी में नजर आते हैं, जबकि इन्हें सादे वर्दी में रहकर तैयार रहना चाहिए। जिस जगह बच्चा डूब रहा था, वहां एसपी सिटी, सिटी मजिस्ट्रेट, कोतवाल समेत फोर्स समेत पहुंचे थे लेकिन ये अफसर भी रेस्क्यू टीम के जवानों का हौसला नहीं बढ़ा सके। जवानों को आपदा प्रशिक्षण मिला होता और उनके पास पर्याप्त संसाधन होते तो आज पुलिस विभाग का मजाक नहीं बनता।

प्लानिंग के तहत तैराकों ने बचाई बालक की जान
जिन तीन तैराकों ने नदी में तेज बहाव से बालक को बचाया, उनकी प्लानिंग बहुत अच्छी थी। लाइफ जैकेट पहने रेस्क्यू टीम के जवान जब नदी में नहीं घुसे तो एक तैराक ने दो साथियों से कहा कि वह नदी में कूदकर बच्चे को गोद में ले लेगा। प्लानिंग से काम होने पर बच्चे को लेकर तैराक नदी से निकाल ले आए।

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