
चंबा। सरकारी और निजी वाहनों में ओवरलोडिंग का सिलसिला अभी तक नहीं रुका है। निजी बसों में ठूंस ठूंस कर सवारियां बिठाई जाती रहीं। इसके अलावा कुछ सरकारी रूटों की बसों में भी दूसरी बस सेवा न होने के कारण छत पर सवारियां बिठाकर ले जाई जा रही हैं। पिछले साल हुए धुलाड़ा बस हादसे के बाद पुलिस व प्रशासन ने दूरदराज के रूटों पर बसों की संख्या बढ़ाने के दावे किए थे, जो अभी तक पूरे नहीं हो पाए हैं। जिला के अधिकतर ग्रामीण इलाकों में अभी भी यातायात के साधन बहुत सीमित हैं। इस कारण ग्रामीणों को बसों में ओवरलोड होकर आना-जाना पड़ता है। चंबा-जुम्हार, चंबा-हिमगिरी, चंबा सलूणी, चंबा-साहो रूट पर अतिरिक्त बसें चलाने बारे जिला परिषद की बैठक में भी मुद्दा गर्माया था। जिला परिषद सदस्य कीड़ी राज सिंह ठाकुर ने भी चंबा-जुम्हार रूट पर अतिरिक्त बस चलाने की मांग की थी। उन्होंने स्पष्ट कहा था कि धुलाड़ा जैसा बस हादसा फिर से जिला में घट सकता है, ऐसे में प्रशासन को समस्या को देखते हुए अतिरिक्त बसें चलानी चाहिए। हैरानी की बात यह रही है बैठक को हुए तीन माह से भी ऊपर समय हो गया लेकिन रूटों पर बसें चलाने बारे निगम ने कोई भी कार्रवाई नहीं की है।
सुबह और शाम के समय बसों में ओवरलोडिंग आम देखी जा सकती है। बसों में जरूरत से ज्यादा सवारियां बिठाई जा रही हैं। यही हाल जीप चलने योग्य सड़कों पर है। यहां जीपों में जरूरत से ज्यादा सवारियां लादी जाती हैं। आरएम विनोद कुमार ठाकुर ने बताया कि निगम की बसों में ओवरलोडिंग न करने की सख्त हिदायत दी गई है। उन्होंने बताया कि निगम के पास अतिरिक्त बसें न होने के कारण रूटों पर अतिरिक्त बसें नहीं भेजी जा सकतीं। एआरटीओ तुन्नहट्टी राम प्रसाद ने बताया कि तमाम रूटों पर सर्वे कर लिया गया है। अब रूटों के लिए परमिट जारी किए जाने हैं। जरूरत के हिसाब से सरकारी बसें भी चलाई जाएंगी। स्थानीय निवासियों चरणजीत सिंह, अनिल कुमार, सोनू, अविनीश ने बताया कि बसों और छोटे वाहनों में ओवरलोडिंग हो रही है। उन्होंने मांग की है कि ज्यादा सवारी वाले रूटों पर अतिरिक्त बसें चलाई जाए। उन्होंने बताया कि बस न चलने के कारण लोगों को मजबूरी में बसों की छत्तों में सफर करना पड़ रहा है।
