प्रशासन को अब आई छोटे मार्गों की याद

रुद्रप्रयाग। आपदा के समय दुर्गाधार-बावईं-सौड़भट्ट- तिलवाड़ा मिसिंग लिंक (दो रास्तों को जोड़)की उपयोगिता के बाद प्रशासन छोटे-छोटे मार्गों की सुध लेने लगा है। जिलाधिकारी ने लोनिवि को मिसिंग लिंक पर ध्यान देने के निर्देश दिए हैं।
जिले में आपदा आने से कुछ समय पहले ही 2.60 किलोमीटर बावईं-सौड़भट्ट मिसिंग लिंक मार्ग का निर्माण पूरा हुआ था। इस सड़क के निर्माण से तिलवाड़ा- सौड़भट्टगांव मोटर मार्ग (15 किमी) और दुर्गाधार-बावईं गांव (चार किमी) मोटर मार्ग आपस में जुड़ गए। आपदा की स्थिति में जब केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग बंद हो गया तो यही एकमात्र मार्ग था, जिससे जिले से केदारघाटी और मंदाकिनी घाटी के वाहन गुजरे। जिले में ऐसे कई स्थान हैं, जहां सड़कों को आपस में जोड़ दिया जाए, तो सड़क मार्ग से कटे गांवों में सड़क यातायात बहाल हो सकता है।
भीरी-पलद्वाड़ी मोटर मार्ग और ऊखीमठ-पठाली-सेमला मोटर मार्ग को जोड़ने से ऊखीमठ और मद्महेश्वर घाटी का सीधा संपर्क हो जाएगा। इसी प्रकार सुमाड़ी-कुमड़ी और विजयनगर-तैला, जैली-मरगांव तथा मयाली-तैला, पैंयाताल-लौंगा और अमकोटी-त्यूंखर और कोटखाल- जागतोली तथा रुद्रप्रयाग-गढ़ीधार मोटर मार्ग को जोड़ दिया जाए, तो लोगों की परेशानी दूर हो सकती है।
पूर्व प्रधान सिताब सिंह रावत और कालीचरण रावत बताते हैं कि विजयनगर-तैला मोटर मार्ग का शुरूआती एक किमी पूर्ण रुप से ध्वस्त हो चुका है। यहां फिलहाल सड़क निर्माण की संभावना नहीं है। यदि तैला मोटर मार्ग के मुसाढुंग प्वाइंट से कुमड़ी को जोड़ दिया जाए, तो यातायात से वंचित हो गए गांवों में वाहन चल सकते हैं। लोनिवि को सिर्फ डेढ़ किमी सड़क ही काटनी है। इसके अलावा यहां रोड कटिंग से गुप्तकाशी जाने के लिए मयाली घूमकर भी नहीं जाना पडे़गा।

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