
शिमला। राज्य कर्मचारी परिसंघ के प्रदेशाध्यक्ष विनोद कुमार ने कहा कि प्रशासनिक ट्रिब्यूनल को सरकार गेंद न बनाए। सत्ता में आने पर एक सरकार इसे बंद करती है और दूसरी बहाल। इसकी बहाली पर दोबारा विचार करने के लिए सरकार से मांग की है। इसकी प्रति केंद्रीय कानून मंत्री, एडवोकेट जनरल, वित्त मंत्री और राज्यों के मंत्रियों को सौंपी है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि इसकी बजाय मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी बनाई जाए। इस कमेटी को सरकार सर्विस मैटर हल करने की शक्तियां दें। विनोद कुमार ने आरोप लगाया कि एक लॉबी सरकार पर दबाव बना रही है। पद की लालसा में कर्मचारियों पर दोबारा से इसे थोपने की साजिश की जा रही है। ट्रिब्यूनल में सेवानिवृत्त आईएएस, आईपीएस व जज की नियुक्ति की जाती है। प्रत्यक्ष रूप से राजनीतिक हस्तक्षेप रहता है। राजनीतिक हस्तक्षेप में कर्मचारियों को न्याय मिलना मुश्किल है। इसकी बहाली को लगभग 100 करोड़ के बजट की जरूरत है। कर्मचारियों को लाभ देने के लिए वित्तीय संकट का बहाना बनाया जा रहा है, लेकिन करोड़ों खर्च कर बंद किए ट्रिब्यूनल को क्यों खोला जा रहा है। 1986 में ट्रिब्यूनल को खोला गया था। इसके बंद होने पर लगभग बीस हजार मामले हाईकोर्ट में शिफ्ट हुए थे, इनमें से 80 फीसदी का निपटारा हो चुका है। हाईकोर्ट ने ट्रांसफर मामले में ऐतिहासिक फैसले दिए हैं। परिसंघ ने सरकार से इस पर दोबारा विचार करने का फैसला लिया है। उनके साथ संजय कपूर, प्रताप सिंह, शीला चंदेल, बाल किशन शर्मा भी मौजूद थे।
