प्रयास हों तो चमकें स्थानीय प्रतिभाएं

उत्तरकाशी। नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के पाइन बाउल स्टेडियम में बनी क्लाइंबिंग वॉल स्थानीय युवाओं के लिए ओलंपिक का दरवाजा खोल सकती है। यहां राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय क्लाइंबिंग प्रतियोगिताओं के सफल आयोजन और वर्ष 2020 में टोकियो जापान ओलंपिक में इस खेल को शामिल करने की पूरी संभावनाएं हैं। यदि इस दिशा में प्रयास हों तो दमखम और मजबूत कदकाठी वाले पहाड़ के युवा इस खेल में देश का प्रतिनिधित्व कर दुनिया में नाम रोशन कर सकते हैं।
फ्रांस का लोकप्रिय खेल क्लाइंबिंग स्पोर्ट्स दुनिया में तेजी से पांव पसार रहा है। हिंदुस्तान के विभिन्न प्रांतों में भी 60 से अधिक क्लाइंबिंग वॉल हैं। वर्ष 2003 में उत्तरकाशी के एनआईएम में भी करीब 55 लाख रुपये की लागत से 15.5 मीटर ऊंची क्लाइंबिंग वॉल तैयार की गई। इस स्टेडियम में बोल्डरिंग वॉल, इंडोर क्लाइंबिंग वॉल तथा आर्टिफिशियल क्लाइंबिंग की भी सुविधा है। जानकारों की मानें तो इस खेल में पहाड़ के युवाओं के लिए अच्छी संभावनाएं हैं। इस खेल को वर्ष 2020 के ओलंपिक में शामिल करने की तैयारी हो रही है। ऐसे में यदि इस दीवार पर उत्तराखंड की प्रतिभाओं को तराशा जाए तो वे देश-दुनिया में राज्य का नाम रोशन कर सकते हैं।
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एनआईएम में हुई क्लाइंबिंग प्रतियोगिता
एनआईएम में अंतरराष्ट्रीय मानकों वाली क्लाइंबिंग वॉल और क्लाइंबिंग की आदर्श स्थितियों के चलते वर्ष 2004 में यहां एशिया कप का सफल आयोजन भी किया गया, जिसमें चीन, कजाकिस्तान, मलेशिया, कोरिया, जापान, इंडोनेशिया, थाईलैंड, हॉंगकॉंग, ईरान आदि देशों के क्लाइंबर्स ने प्रतिभाग किया। इसके बाद यहां स्टेट तथा नेशनल चैंपियनशिप और अब सेना की सेंट्रल कमांड की क्लाइंबिंग प्रतियोगिता भी आयोजित की जा चुकी हैं।
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स्थानीय युवाओं को क्लाइंबिंग स्पोर्ट्स से जोड़ने के प्रयास किए जाएंगे। इसके लिए आईएमएफ से संपर्क कर प्रशिक्षण कोर्स शुरू किया जाएगा। संस्थान के कुछ प्रशिक्षकों को आईएमएफ से जज और रूट सेटर का कोर्स कराने की तैयारी है। अवसर मिले और कोशिश की जाए तो पहाड़ के युवा इस खेल में काफी आगे जा सकते हैं। – कर्नल अजय कोठियाल, प्रधानाचार्य एनआईएम।

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