प्रतीक्षालय की मरम्मत भी नहीं हुई

देवाल। 12 आबादी पड़ावों से होकर मां नंदा राजजात में अपने पहले निर्जन पड़ाव गैरोली पातल पहुंचती है, लेकिन वाण से यहां तक का रास्ता भी मुश्किलों भरा है। तैयारी के नाम पर यहां कोई काम नहीं हो पाया है। स्थिति यह है कि दो साल से क्षतिग्रस्त प्रतीक्षालय की मरम्मत तक नहीं हो पाई है।
वाण गांव के बाद मां नंदा राजजात हिमालय क्षेत्र में प्रवेश करती है। वाण गांव से करीब पांच किमी आगे रणकधार पहुंचती है। मान्यता है कि यहां पर देवी ने अंतिम दैत्य का वध किया था। इसके बाद यात्रा कैल गंगा पहुंचती है। यहां देवी की विशेष पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस नदी में कपड़े के थान को डालकर पार किया जाता है। नदी में पानी कितना भी अधिक क्यों न हो, लाटू देवता के पानी में अपना निशान डालते ही यह कम हो जाता है और श्रद्धालु नदी पार कर लेते हैं। राजजात द्वाणीग्वर पहुंचती है। यहां से दाडिमडाली होते हुए मां नंदा की राजजात अपने पहले निर्जन पड़ाव गैरोली पातल में रात्रि विश्राम के लिए पहुंचती है।

शौचालयों का काम भी नहीं हुआ शुरू
वाण से गैरोली पातल के लिए पैदल रास्ता बना है। निर्माणाधीन प्रतीक्षालय का लेंटर डाल दिया है। साढ़े तीन किमी दूर नील गंगा से स्थायी पेयजल योजना बन रही है, लेकिन योजना पर पर्याप्त पानी नहीं है। सुलभ इंटरनेशनल के सहयोग से बनने वाले शौचालयों का काम भी शुरू नहीं हो सका है। टेंट कॉलोनी का प्रस्ताव भी फलीभूत नहीं हो पाया है। वर्तमान में यहां दो फाइबर तैयार किए गए हैं।

वाण से गैरोली पातल तक पैदल खंड़चा रास्ता तैयार हो गया है। पड़ाव पर पेयजल योजना और प्रतीक्षालय का कार्य अंतिम चरण में है, लेकिन बारिश से काम प्रभावित हो रहे हैं।
– एसपी बर्मा, रेंजर देवाल रेंज व निर्जन पड़ाव अधिकारी गैरोलीपातल

अप्रैल-मई में राजजात तैयारियाें के नाम पर किसी भी विभाग ने काम मानकों पर नहीं किया। अब बरसात का रोना रोया जा रहा है। निर्जन पड़ावों के लिए शासन- प्रशासन की ओर से कोई व्यवस्था नहीं की गई है।

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