
शिमला। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने वीरवार को जाखू में लाल बुरांस का पौधा रोपकर नगर निगम के वन महोत्सव का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर कहा कि राजधानी सहित समूचे प्रदेश को प्रकृति ने अपार वन संपदा से नवाजा है। यह हम सभी का नैतिक कर्तव्य तथा दायित्व बनता है कि वन संपदा के संरक्षण के साथ-साथ पौधरोपण कर वन क्षेत्र का विस्तार करें। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण में वनों की अहम भूमिका हैं, जो स्वच्छ वातावरण उपलब्ध करवाते है। लेकिन, शहरी क्षेत्रों के बढ़ने से वनों पर दबाव बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि देवदार के अतिरिक्त वृक्षों की अन्य किस्मों विशेषकर फलदार पौधों जैसे चिनार, चैसनेट और आड़ू तथा फलदार झाड़ियों का शिमला शहर विशेषकर जाखू क्षेत्र में रोपण किया जाना चाहिए ताकि बंदरों को माल रोड़, लोअर बाजार सहित अन्य जनसंख्या वाले क्षेत्रों से दूर रखा जा सके। नगर निगम शिमला देश का पुराना शहरी निकाय है और इसके पदाधिकारियों तथा कर्मचारियों को शिमला के पुराने वैभव को दोबारा बहाल करने के लिए प्रयास करने चाहिए। नगर निगम पुराने समय में पौधों की नर्सरी के लिए जाना जाता रहा था, जिसे निगम को दोबारा आरंभ करना चाहिए तथा विभिन्न पौधों और फूलों की नई नर्सरी को तैयार कर आम लोगों को पौधे बेचने चाहिए।
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महापौर ने मांगा 1900 हेक्टेयर वन क्षेत्र
महापौर संजय चौहान ने मुख्यमंत्री को बताया 2011 में भाजपा सरकार ने नगर निगम को शहर का 842 हेक्टेयर वन क्षेत्र सौंपा था। इस क्षेत्र की भी रखवाली नगर निगम को दी गई है। जबकि, वन विभाग को वनों से सालाना छह करोड़ की आय हो रही है। नगर निगम शहर के जंगलों का चौकीदार बन कर रह गया है। साल 2006 से पूर्व शहर का 1900 हेक्टेयर वन क्षेत्र नगर निगम के पास था। इस पर मुख्यमंत्री ने महापौर की मांग को प्राथमिकता के आधार लेते हुए जल्द वन क्षेत्रों के अधिकारी नगर निगम को देने का आश्वासन दिया।
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मंत्री, नेता, अफसर रहे मौजूद
इस अवसर पर शहरी विकास एवं आवास मंत्री सुधीर शर्मा, मुख्य संसदीय सचिव वन राजेश धर्माणी, मुख्य संसदीय सचिव इंद्र दत्त लखनपाल, उप महापौर टिकेंद्र सिंह पंवर, निगम पार्षद, पूर्व महापौर सोहन लाल, पूर्व उप महापौर हरीश जनारथा, पीसीसीएफ वन्य जीव एके गुलाटी, उपायुक्त दिनेश मल्होत्रा, आयुक्त अमरजीत सिंह, वन अरण्यपाल केएस ठाकुर, वन मंडलाधिकारी इंद्र कुमार सहित अन्य अधिकारियों, वरिष्ठ नागरिक और विभिन्न स्कूलों के बच्चों ने भी विभिन्न किस्मों के पौधे लगाए।
