
नगरोटा सूरियां (कांगड़ा)। पौंग झील में प्रवासी पक्षियों की गणना का कार्य समाप्त हो गया है। पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ कम चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन एसबी इस्लाम ने बताया कि इस बार पौंग झील में 113 प्रजातियों के एक लाख 23 हजार प्रवासी पक्षियों ने डेरा जमाया है।
पक्षी गणना में 80 कर्मचारियों व विशेषज्ञों की 23 टीमें लगाई गईं थीं। एसबी इस्लाम के मुताबिक पौंग झील में वार हैडेड गूज 34 हजार, लार्थन पिनटेल 21 हजार, कूटस 14 हजार, कामन पोचार्ड 12 हजार, टफटड डक 8 हजार, लिटल कार्मोंनेंट 7 हजार 7 सौ, कामन टील 6800, कामन शैल डैक 35 गिने गए। जबकि 113 वर्ष के अंतराल बाद हूपर स्वॉन नामक पक्षी का जोड़ा भी पौंग झील में देखा गया। उन्होंने बताया कि वर्ष 1900 में जनरल ऑसवान ने तलवाड़ा के पास इस प्रजाति के पक्षी को देखा था। इसके बाद भारत में इस प्रजाति के पक्षी को कहीं भी नहीं देखा गया। इसके अलावा अन्य प्रजातियों में रूड़ी ब्रेस्टेड क्रेक एक, ग्रेट क्रेस्टड ग्रीव 370, ग्रे लेग गूज 50, रेड क्रेस्टेड पोचार्ड 110, फ्रेजुनेस पोचार्ड 11, कामन मर्गेंजर 10, यूरेशियन स्पूनविल 10, ग्रेट वाईटड फ्रंटज गीज 10, सारस क्रेन 7, वैस्टन मार्श हैरियर 5 तथा ओसपरे 7 पक्षी पौंग झील में देखे गए। सभी प्रवासी पक्षी ट्रांस हिमालयन क्षेत्र तिब्बत, मध्य एशिया, रशिया तथा साईबेरिया से पौंग झील में अक्तूबर माह में आने शुरू होते हैं और मार्च में वापस वतन लौट जाते हैं।
