पैदा होते ही मर जाते हैं लाखों बच्चे

हल्द्वानी। दुनिया में लाखों बच्चे पैदा होते ही मर जाते हैं। यह एक बच्चे की ही मौत नहीं, बल्कि माता-पिता के सपने भी मरते हैं। आंखों में जीने का सपना लेकर धरती पर उतरने वाले नवजातों की बेवक्त होती मौतों का सबसे बड़ा कारण सांस में दिक्कत है। इसके बाद समय से पहले पैदा होना और इंफेक्शन भी मौत के कारणों में है। इन्हीं जटिल समस्याओं के समाधान और बच्चों की मौत का आंकड़ा कम करने पर मेडिकल कालेज में आयोजित कार्यशाला में चर्चा हुई। कार्यशाला में शिरकत करने के लिए मध्यप्रदेश और यूपी से भी डाक्टर आए।
मेडिकल कालेज हल्द्वानी की एसोसिएट प्रोफेसर डा. रितु रखोलिया, रेवा मेडिकल कालेज के डा. अशोक रावत, मेडिकल कालेज आगरा के डा. प्रजापति और गुरु रामराय मेडिकल कालेज देहरादून के डा. उत्कर्ष ने कार्यशाला में मौजूद छात्रों को एडवांस नियोनेटल रिस्परेशन के बारे में बताया। डा. रितु ने बताया कि पैदा होते ही मरने वाले बच्चों की मौत का सबसे बड़ा कारण सांस की बीमारी ही है। इससे निपटना आज भी चुनौती बना हुआ है।

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