
पिथौरागढ़। अंशदायी पेंशन योजना में कार्यरत प्राथमिक शिक्षकों को पेंशन योजना में शामिल की मांग मुखर होने लगी है। शिक्षकों ने अब न्यायालय की शरण लेने का मन बना लिया है। आंदोलन को सफल बनाने के लिए जितेंद्र वल्दिया और ललित बसेड़ा को संयोजक बनाया गया है।
जिला मुख्यालय में हुई बैठक में वक्ताओं ने कहा कि पिथौरागढ़ और चंपावत जिले में रिक्त चल रहे शिक्षकों के पदों के लिए 6 अगस्त, 2004 को विज्ञप्ति निकाली गई। इसके बाद चंपावत के 100 और पिथौरागढ़ के 171 शिक्षकों को छह माह का प्रशिक्षण भी दिया गया। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद 21 सितंबर, 2005 को नियुक्ति के लिए विज्ञप्ति जारी की गई। बताया कि चंपावत जिले के प्रशिक्षणार्थियों को 28 सितंबर, 2005 को नियुक्ति दे दी गई। जबकि तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी की लापरवाही की वजह से पिथौरागढ़ के शिक्षकों को 7 अक्तूबर को नियुक्ति पत्र मिल सका। इस वजह से पिथौरागढ़ जिले के शिक्षक पेंशन योजना में शामिल होने से वंचित रह गए। शिक्षकों ने शिक्षा महकमे की इस लापरवाही के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का निर्णय लिया है। बैठक में कैलाश जोशी, योगेश पांडेय, त्रिलोचन जोशी, मदन शाही, प्रमोद जोशी, हिमांशु तिवारी, हरीश पंत, चंद्रमोहन सिंह आदि मौजूद थे।
