पुल न बनने पर चुनाव का बहिष्कार

पलचान (मनाली)। मनाली के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल सोलंगनाला के पास सोलंग गांव के बाशिंदों ने लोकतंत्र के महायज्ञ में आहुति नहीं डाली। ग्रामीण गांव के लिए पुल न होने के कारण 2013 के लोस उपचुनाव का भी बहिष्कार कर चुके हैं। ग्रामीणों का आरोप है सोलंग गांव आजादी के 67 साल बाद भी उपेक्षा का शिकार बना हुआ है। गांव के लिए आज तक स्थायी पुल तक नहीं बन पाया है। पर्यटन की दृृष्टि से विश्व भर में विख्यात सोलंग वैली आज भी कई सुविधाओं को तरस रही है। सालों से लोगों की मांग सोलंग गांव को जोड़ने वाले ब्यास नदी पर एक टिकाऊ पुल बनाने की है। पुराना पुल वर्ष 2005 की बाढ़ में बह गया था। गांव के 350 बाशिंदे अभी भी जान जोखिम में डालकर लकड़ी के अस्थायी पुल से पीठ पर बोझ ढोकर ले जाते हैं। इसी समस्या को लेकर 2013 में हुए मंडी उपचुनाव का सोलंग के ग्रामीणों ने बहिष्कार किया था। इसका सरकार और प्रशासन पर कोई असर नहीं पड़ा। गांव के देवी चंद ठाकुर, टिकमराम ठाकुर, कर्म चंद, गोकुल चंद, बोधी देवी, निर्मला देवी, लाल चंद तथा चमनलाल आदि ने बताया कि वे कई सालों से कठिन जीवन व्यतीत कर रहे हैं। चुनाव के समय स्थायी पुल बनाने के कई वायदे एवं घोषणाएं कई राजनीतिक दलों ने कीं, मगर धरातल पर काम नहीं हो पाया।

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