पुलिस की भूमिका से संतुष्ट नहीं परिजन

बिलासपुर। स्वारघाट थानांतर्गत एक लड़की की कथित किडनैपिंग के मामले में परिजन पुलिस की भूमिका से संतुष्ट नहीं हैं। पुलिस लड़की के साथ ही उसे भगा ले जाने के आरोपी को भी पकड़ चुकी है। इसके बाद लड़की उसी युवक के साथ उसके साथ जा चुकी है, लेकिन परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने निष्पक्ष काम नहीं किया।
वीरवार को बिलासपुर में पत्रकार वार्ता में समलेटू निवासी रामपाल ने कहा कि उनकी लड़की सुषमा गत 23 मार्च को लापता हो गई थी। उन्होंने 24 मार्च को स्वारघाट थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। इसके बाद उन्हें जानकारी मिली कि जम्मू-कश्मीर का रहने वाला शमशदीन उर्फ शम्मी नामक युवक उनकी बेटी को बहला-फुसलाकर ले गया है। एक-सवा माह बाद सुषमा का उनकी भानजी को फोन आया। उसने बताया कि वह बारामूला में है। वह जिन लोगों के साथ है, उनसे उसे डर लग रहा है। उन्हाेंने थाने में इसकी जानकारी दी। इस पर पुलिस ने गत तीन मई को प्राथमिकी दर्ज की।
रामपाल के अनुसार काल डिटेल की जांच करने के बाद पुलिस गत 9 मई को जम्मू-कश्मीर गई। वह भी पुलिस के साथ गए। वहां जाने के लिए उन्होंने 15 हजार में गाड़ी की। 10 मई को दोपहर बाद वे श्रीनगर के शोंपिया जिला पहुंचे। शाम पांच बजे जम्मू-कश्मीर पुलिस ने उनकी बेटी व आरोपी युवक को बरामद भी करा दिया। बताया गया कि वे दोनों शादी कर चुके हैं, लेकिन वे इस बारे कोई दस्तावेज नहीं दिखा सके। उन्हें लेकर वे 11 मई को स्वारघाट पहुंचे। उन्हाेंने आरोप लगाया कि पुलिस ने परिजनों को न तो बेटी से खुलकर बात करने दी और न ही उनके साथ घर भेजा। शाम को ही बेटी का दोबारा फोन आया कि वह जेएंडके पहुंच चुकी है। उन्हाेंने आरोप है कि पुलिस ने निष्पक्ष काम करने के बजाए दूसरे पक्ष को तरजीह दी। इस मौके पर रामपाल की पत्नी फूलां देवी तथा परिवार के सदस्य भी थे। एसपी अनुपम शर्मा ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पुलिस ने किडनैपिंग का मामला दर्ज किया था। उसने परिजनों के साथ जाने से इंकार करते हुए लड़के के साथ जाने की बात कही। उसने कोर्ट में भी अपना बयान दिया है।

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