
रुड़की। पनियाला सहकारी समिति के चुनाव दोबारा कराए जाने की बजाए पुर्नमतगणना से सभापति और उपसभापति का चुनाव संपन्न करा दिया गया। अभी तक मार्च माह में हुए चुनाव को निरस्त बता रहे अधिकारी भी अब चुनाव स्थगित किए जाने की बात कह रहे हैं। दूसरी ओर, डीसीबी के पूर्व चेयरमैन सुरेंद्र पनियाला ने सहकारिता विभाग के साथ ही शासन-प्रशासन पर जिला सहकारी बैंक की कुर्सी पर कब्जा करने के लिए मनमानी करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि मामले को हाईकोर्ट में ले जाया जाएगा।
गौरतलब है कि गत 22 मार्च में हुए पनियाला सहकारी समिति के डायरेक्टर चुनाव में फर्जी मतपत्र मिलने पर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट सोनिका की रिपोर्ट पर तत्कालीन जिलाधिकारी सचिन कुर्वे ने चुनाव निरस्त कर दिए थे जिससे समिति के चुनाव दोबारा कराए जाने की बात सहकारिता विभाग के अधिकारी और चुनाव अधिकारी पिछले तीन माह से कहते आ रहे थे। सहकारिता विभाग के अधिकारियों की ओर से चुनाव दोबारा कराए जाने के लिए तो शासन को पत्र भेजकर तिथियां मांगने की बात भी कही जा रही थी, लेकिन अचानक से समिति के दोबारा चुनाव कराए जाने की बजाए तीन वार्डों की रविवार को पुर्नमतगणना कराकर उनके डायरेक्टरों को घोषित कर दिया गया। जबकि इन्हीं डायरेक्टर सीटों पर सैकड़ों फर्जी मतपत्र जांच के दौरान पाए गए थे और इसी आधार पर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट की रिपोर्ट पर तत्कालीन डीएम ने चुनाव निरस्त कर दिए थे। सोमवार को सभापति और उपसभापति का चुनाव भी संपन्न करा दिया गया। सहकारिता विभाग की यह कार्यशैली जहां किसान नेताओं की समझ में नहीं आ रही है, वहीं खुद भी विभाग में इसको लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।
