
शिमला

हिमाचल में चुने हुए विधायक पीली नहीं, लाल बत्ती ही चाहते हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद वापस ली गई लालबत्तियों के बाद पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों ने अपने यहां विधायकों को रेड लाइट के बजाय एंबर लाइट दी है।
हिमाचल में फर्स्ट टाइमर एमएलए एसोसिएशन विधायकों के लिए लाल बत्ती बहाल करने की मांग करती रही है। इस चर्चा के बीच सरकार की ओर से प्रस्ताव था कि पड़ोसी राज्यों की तर्ज पर यहां भी एंबर लाइट देने पर विचार किया जा सकता है, लेकिन ये एसोसिएशन को मंजूर नहीं है।
एसोसिएशन ने तर्क दिया है कि सुप्रीम कोर्ट ने लालबत्तियों का दुरुपयोग रोकने को कहा था। विधायक संवैधानिक पद पर होते हैं और संविधान के तहत शपथ भी लेते हैं। एक तर्क यह भी है कि इससे संस्था की गरिमा प्रभावित हो रही है।
विधायकों को कई समारोहों में रिसीव करने वाले डीसी, एसडीएम के पास ये सुविधा है और विधायक के पास नहीं। इन सब कारणों का हवाला देते हुए विधायक एसोसिएशन नए सिरे से मामला सरकार से उठा रही है। एसोसिएशन में इस वक्त 26 सदस्य हैं।
31 मार्च को लालबत्ती उतारी थी सरकार ने
10 दिसंबर 2013 को सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद राज्य सरकार ने इसे 31 मार्च 2014 को अधिसूचना जारी कर लागू किया था। इसमें केवल उन्हीं वीआईपी को लालबत्ती (फ्लैशर और फ्लैशर के बिना) जो नेशनल फ्लैग कोड 2002 के तहत कवर होते थे।
विधायकों, सीपीएस और निगम-बोर्डों के अध्यक्षों, उपाध्यक्षों की लालबत्तियां उतर गई थीं। अफसरों में मुख्य सचिव और डीजीपी तथा डीसी, एसडीएम के पास यह सुविधा रखी गई। इसी अधिसूचना का एमएलए विरोध कर रहे हैं।
एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय रतन का कहना है कि 25 और 26 जून को विधायक एसोसिएशन की शिमला में बैठक प्रस्तावित है। इसमें सरकार से नए सिरे से ये मसला उठाने पर चर्चा करेंगे। जरूरत पड़ी तो एसोसिएशन इस मामले को अपने स्तर पर सुप्रीम कोर्ट में उठा सकती है।
