
शिमला। शिमला शहर में लगभग हर साल फैलने वाले पीलिया पर आईपीएच विभाग ने अपने स्तर पर निर्णायक कदम उठाने की पहल की है। सोमवार को सचिवालय में अतिरिक्त मुख्य सचिव विनीत चौधरी की पहल पर इस बारे में हुई बैठक में अहम फैसले लिए गए। यह बैठक उस सब ग्रुप की सिफारिशों पर बुलाई गई थी, जो शिमला शहर में फैले पीलिया पर बनाया गया था।
बैठक में सब ग्रुप से उनकी स्टडी के आधार पर कुछ और जवाब मांगे गए हैं। ग्रुप को बताना होगा कि शहर में पेयजल के स्रोत मानव जनित प्रदूषण की चपेट हैं या कोई और कारण हैं? यदि प्रदूषण मनुष्य द्वारा पैदा किया गया है, तो क्या इसे रोकने के लिए कोई कानून बनाया जाना चाहिए? यदि ग्रुप ने कानून बनाने की जरूरत जताई तो मुख्य सचिव के लिए एक प्रेजेंटेशन तैयार की जाएगी। बैठक में तय हुआ कि शिमला शहर में नगर निगम और आईपीएच विभाग पानी के सैंपल भरते हैं, लेकिन रिपोर्ट पर लोगों को भरोसा नहीं होता। इसलिए किसी स्वतंत्र एजेंसी से टेस्टिंग करवाने को एमओयू किया जाएगा। मल्याणा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के सही तरीके से काम न करने के कारण अश्वनी खड्ड का पानी दूषित हो रहा है, जहां से शहर को सप्लाई आती है। इसलिए इस प्लांट को 100 फीसदी मानकों पर ही चलाने के निर्देश दिए गए। यह भी कहा गया कि नगर निगम प्रवासी बस्तियों को पब्लिक टैप दे और दूषित बावड़ियों को बंद करवाए। केवल सूचना पट्ट लगाने से कोई लाभ नहीं हो रहा है। सब ग्रुप की इसी रिपोर्ट को सुझावों के लिए आईपीएच विभाग ने भारत सरकार के स्वास्थ्य विभाग को भी भेजा है। आईआईआईटी रूड़की से भी इस बारे में सुझाव मांगे गए हैं। बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव के अलावा विशेष सचिव डा. सुशील कापटा, अनुभाग अधिकारी मनमोहन जस्सल और सब ग्रुप के कई अफसर शामिल थे।
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ये था पीलिया पर बना सब ग्रुप
शिमला। राज्य सरकार ने इसी साल मुख्य अभियंता एमएस कंवर की अध्यक्षता में एक सब ग्रुप पीलिया के कारण तलाशने के लिए बनाया था। इसमें एसई सुमन विक्रांत, एसई केसी धीमान, हेल्थ आफिसर नगर निगम डा. उमेश भारती, जिला स्वास्थ्य निगरानी अधिकारी डा. मनोज महंतान और सदस्य सचिव प्रीत महेंद्र शामिल थे। इन्होंने अतिरिक्त मुख्य सचिव आईपीएच को अपनी रिपोर्ट दी थी। इस रिपोर्ट पर अब आईपीएच विभाग ने अपने स्तर पर कसरत शुरू की है।
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2007, 2010 और 2013 में फैला पीलिया
शिमला। सब ग्रुप ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि शिमला शहर में वर्ष 2007, 2010 और 2013 में पीलिया के ज्यादा मामले सामने आए। जिन स्थानों पर इसके ज्यादा केस पाए गए, वहां पेयजल की सप्लाई अश्वनी खड्ड से थी। यानी इस स्रोत के पानी में कुछ गड़बड़ है। दूसरा बावड़ियों के आसपास या तो प्रवासी लोग बसे हैं या फिर कैचमेंट एरिया में ढारे हैं। तीसरी वजह ओपन सीवरेज टैंकों को माना गया, जिन्हें बरसात के दिनों में नालों में खोल दिया जाता है।
