
शिमला। अश्वनी खड्ड का पानी पीने लायक नहीं है। इसका खुलासा सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग (आईपीएच) की रिपोर्ट में हुआ है। पीलिया फैलने की वजह भी अश्वनी खड्ड के पानी को बताया गया है। आईपीएच की सब कमेटी ने रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मर्ज एरिया में सीवरेज की कनेक्टिविटी पूरी तरह से नहीं हो पाई है। यही सीवरेज का पानी अश्वनी खड्ड में पहुंच रहा है। पानी ट्रीट करने के बाद भी पीने लायक नहीं है। इस पानी को पीने से पूर्व उबालने की अति आवश्यकता है।
हाल ही में शहर में फैले पीलिया की जड़ तक जाने के लिए आईपीएच ने छह सदस्यीय सब ग्रुप गठित किया था। सब ग्रुप ने करीब दो माह तक पड़ताल की। रिपोर्ट में सामने आया है कि अश्वनी खड्ड में सीवरेज का पानी मिल रहा है। पानी को ट्रीट तो किया जा रहा है बावजूद इसके ये पीने लायक नहीं। नगर निगम के मर्ज एरिया के वार्डों में सीवरेज कनेक्टिविटी नाममात्र है। अधिकांश घरों से निकल रहा सीवरेज खुले में बह रहा है, जो प्राकृतिक जल स्रोतों को दूषित कर रहा है। खुले में शौच भी पीलिया की वजह बताई गई है।
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मर्ज एरिया के लोग ज्यादा प्रभावित
सब ग्रुप ने 2007, 2010 और 2013 में पीलिया की चपेट में आए मरीजों की स्टडी की है। जांच रिपोर्ट के मुताबिक 2007 में 700 लोग पीलिया की चपेट में आए। 2010 में 150 और 2013 में 160 से अधिक लोग पीलिया की चपेट में आए हैं। पीलिया के ग्रसित अधिकांश लोग मल्याणा, चम्याणा, न्यू शिमला, कसुम्पटी और विकासनगर से हैं। इन क्षेत्रों में अश्वनी खड्ड से पानी की सप्लाई की जाती है।
मल्याणा ट्रीटमेंट प्लांट पर भी सवाल
जांच में मल्याणा स्थित ट्रीटमेंट प्लांट पर भी सवालिया निशान लगाया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक मल्याणा में ट्रीटमेंट प्लांट से निकलने वाला गंदा पानी अश्वनी खड्ड में जाकर मिल रहा है जो पानी को जहरीला कर रहा है। इस कारण क्षेत्र में पीलिया फैल रहा है।
बरसात में फिर फैल सकता है पीलिया
सब ग्रुप ने पीलिया फैलने के कारणों का उल्लेख करने के साथ-साथ इसके समाधान के लिए सुझाव भी दिए हैं। सब ग्रुप ने कहा है कि अगर अश्वनी खड्ड में सीवरेज की गंदगी को मिलने से नहीं रोका गया तो बरसात में फिर से पीलिया पैर पसार सकता है।
उच्च अधिकारियों को सौंपी रिपोर्ट
आईपीएच के चीफ इंजीनियर एमएस कंवर ने बताया कि जांच रिपोर्ट तैयार कर उच्च अधिकारियों को भेज दी है। रिपोर्ट में पीलिया फैलने और इसके समाधान के लिए सुझाव दिए गए हैं। सुझाव और आपत्तियों की लिस्ट बनाकर दी गई है। उच्च अधिकारियों से आदेश मिलने के बाद आगामी कार्रवाई की जाएगी।
