
उत्तरकाशी। जिले के आपदा प्रभावितों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। जिले के प्रभारी मंत्री हरीशचंद्र दुर्गापाल को भी बाढ़ पीड़ितों के गुस्से का सामना करना पड़ा। पीड़ितों ने जिला सभागार में हुई बैठक में जमकर हंगामा काट आपदा से हुए नुकसान का उचित मुआवजा देने के साथ ही भवनों की सुरक्षा की मांग की है। शनिवार को प्रभारी मंत्री हरीशचंद्र दुर्गापाल ने आपदा प्रभावित व अधिकारियों की बैठक ली। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली, पानी और सड़क की सुविधा तत्काल बहाल करने के निर्देश दिए। मंत्री ने एसडीएम भटवाडी केके सिंह को निर्देश दिए कि जो भवन रहने लायक नहीं हैं, उन्हें पूर्ण रूप से ध्वस्त दिखाया जाए। जिससे प्रभावितों को मानकों के अनुरूप मुआवजा मिल सके। कहा कि आपदा पीड़ितों को सरकार सभी सुविधा मुहैया कराएगी। इसके लिए पीड़ितों के आपदा कार्ड बनाए जायेंगे।
इस मौके पर शहरी विकास मंत्री प्रीतम सिहं पंवार, संसदीय सचिव विजयपाल सजवाल, नगर पालिका अध्यक्ष जयेंद्री राणा, सुरेश चौहान, विजय सेमवाल समेत विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।
आखिर क्यों भड़क रहे हैं एसडीएम
उत्तरकाशी। भटवाड़ी एसडीएम केके सिंह पिछले तीन दिनों से बार-बार गुस्से में आ रहे हैं। तीन दिन पहले जोशियाड़ा के ग्रामीणों के गुस्से को एसडीएम सहन नहीं कर पाए और नौकरी करने में असमर्थता जता दी थी। शनिवार को भी जिले के प्रभारी मंत्री की वार्ता में एसडीएम आग बबूले हो गए। प्रभारी मंत्री ने पीड़ितों के सामने किसी तरह एसडीएम को शांत कराया।
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प्रभावितों की मदद को गंभीर नहीं सरकार : महारानी
उत्तरकाशी। टिहरी सांसद महारानी राज्यलक्ष्मी शाह ने कहा कि राज्य सरकार आपदा पीड़ितों की सहायता को लेकर गंभीर नहीं है। बेघर हुए परिवारों कोे अभी तक कोई भी आर्थिक मदद नहीं मिल पा रही है। उन्होंने आपदा को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग की है। सांसद ने शनिवार को गंगोरी, जोशियाड़ा और तिलोथ का भ्रमण करने के बाद पत्रकारों से बातचीत में कहा कि प्रदेश सरकार आपदा की इस घड़ी में प्रभावितों की मदद को लेकर कतई गंभीर नहीं है। भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष खजानदास ने कहा प्रशासन के पास अभी तक बाढ़ प्रभावितों की वास्तविक सूची तक उपलब्ध नहीं है। इस मौके पर प्रदेश महामंत्री ज्ञान सिंह नेगी, जिलाध्यक्ष बैशाखू लाल, लोकेंद्र बिष्ट, पूर्व जिलाध्यक्ष कीर्ति भट्ट मौजूद रहे।
