पावर हैमर से लोहा कूट हो रही चांदी

मंडी। जिले की थाची पंचायत के चौहड़ी गांव में लोहगिरी के परंपरागत व्यवसाय को नाबार्ड की मदद से नई दिशा मिली है। इससे सदियों पुराने व्यवसाय को पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाने वाले कारीगरों में नए आत्मविश्वास का संचार हुआ है। मंडी साक्षरता एवं जन विकास समिति ने सदियों से लोहारगिरी के काम में लगे लोगों के समूह को तकनीक में सुधार करने के लिए न केवल प्रेरित किया। बल्कि इसके लिए स्वयं सहायता समूह का गठन कर नाबार्ड से शेड बनाने के लिए डेढ़ लाख रुपये की मदद दिलवाई। इसके अलावा लोहार की भट्टी में भेड़ की खाल से बनी धौंकनी की जगह पर बिजली की मोटर से हवा देने तथा गर्म लोहे को कूटने के लिए अब लोहार को पसीना नहीं बहाना पड़ेगा।
इसके लिए बिजली से चलने वाले पावर हैमर से लोहा कूटने का काम होने लगा है। स्थानीय आशु देवता स्वयं सहायता समूह के प्रधान चंद्रमणी, एवली राम, थाची पंचायत की प्रधान हिमी देवी, मेघ सिंह ने बताया कि ढाई लाख की लागत से लगे पावर हैमर से उनके काम में दस गुणा वृद्धि हुई है। वहीं, पर कृषि औजार बनाने के लिए तीन आदमियों का काम अब एक ही आदमी करने लगा। थाची के चौहड़ी गांव में परंपरागत ढंग से कृषि औजार दराती, कुल्हाड़ी, कुदाली बनाने का काम होता है। इस गांव के 60 परिवार इसी व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। जो सालाना करीब दस से पंद्रह क्विंटल लोहे के औजार बनाकर बेचते हैं। चंद्रमणी ने बताया कि पहले दिन भर हथौड़ा चलाने से शाम तक थककर चूर हो जाते थे। मगर अब पावर हैमर ने तो जैसे हमारी तकदीर बदल दी है। इधर, मंडी साक्षरता एवं जनविकास समिति के समन्वयक भीम सिंह का कहना है कि नाबार्ड की मदद से इस क्षेत्र में दो लोहगिरी क्लस्टर बनाए गए हैं। जिन्हें शेड बनाने से लेकर आधुनिक मशीनरी खरीदने और चीड़ की पत्तियों से कोयला बनाने की तकनीक सिंचाई गई है।

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