पालमपुर-सुजानपुर हाइवे पर गुंडागर्दी

डरोह (कांगड़ा)। पालमपुर-सुजानपुर हाइवे के मूंढी गांव में शरारती तत्वों ने रात करीब 12 बजे चोर समझकर भवारना के एक व्यक्ति की वैन को निशाना बना डाला। क्षेत्र में गाड़ी तोड़ने और चालकों से मारपीट का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले मट्ट, कुरल, डरोह व गदियाड़ा में भी चालकों से मारपीट व वाहन तोड़ने के मामले सामने आए हैं।
चोरों को खुद पकड़ने के नाम पर क्षेत्र में इन दिनों रात को कानून की परवाह किए बगैर कुछ लोग नशे में धुत होकर सड़क में से गुजरने वाले वाहन चालकों को अपना निशाना बना रहे हैं। प्रशासन और पुलिस से बिना अनुमति के यह लोग सड़कों से रात को गुजरने वाले हर वाहन को चेकिंग के लिए रोक रहे हैं। अगर कोई चालक उनके कहने पर नहीं रुक रहा तो वह उसको ही चोर समझकर पीटना शुरू कर दे रहे हैं। यही नहीं, बेखौफ होकर कानून को अपने हाथों में लेकर यह लोग वाहनों की भी तोड़फोड़ कर रहे हैं। उधर पुलिस अपनी मर्जी से चोरों को पकड़ने के लिए नाका लगाने वालों को खुले में गुंडागर्दी करने के मौके दिए जा रही है। इसके चलते इस सड़क मार्ग पर रात को वाहन चलाने से हर कोई परहेज कर रहा है। वाहन चालकों में भी पुलिस के प्रति रोष है। उनका कहना है कि पुलिस को ऐसे अवैध नाके लगाने वाले लोगों पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।
रमेश चंद, करतार, पिंकू, पाल, निक्का, राजेंद्र, सुरजीत, राकेश, दिलबर, सुरजीत, रोहित, मोहित, जयराम, गोरा, हरीश, गरीशू, सरताज, छोटू, कांचा, मुकेश, सन्नी कुमार, राकेश, अर्जुन, बिंदू, नवीन, संतोष, मोहिंद्र, बिंटू आदि ने बताया कि पुलिस ने अगर गुंडागर्दी करने वालों पर रोक नहीं लगाई तो इसके भयानक परिणाम होंगे। भवारना पुलिस थाना में चालकों से मारपीट और वाहनों को क्षति पहुंचाने के रोजाना मामले पहुंच रहे हैं। लेकिन अभी तक कार्रवाई के नाम पर कुछ भी नहीं हो रहा है। भवारना पुलिस थाना एसएचओ ब्रह्मदास ने बताया कि रात को पुलिस की अनुमति के बिना वाहनों को रोकना अवैध है। अगर कोई अनावश्यक मारपीट करता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

अखबार की गाड़ियां रोक की थी मारपीट
अभी दो दिन पूर्व ही असामाजिक तत्वों ने नगरोटा स्थित एक दैनिक समाचार पत्र की प्रेस के लिए जा रही दो गाड़ियों को रोककर उनके चालकों से मारपीट की थी। इसमें एक चालक बुरी तरह से लहूलुहान हो गया। वारदात को कई घंटे बीत जाने के बावजूद पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी है। दोनों ही मामलों में सवाल पुलिस पर है कि ऐसी क्या जरूरत आन पड़ी कि आम जनता को चोरों को पकड़ने खुद सड़कों पर उतरना पड़ रहा है। पुलिस न तो चोरों को पकड़ पा रही है और न ही चोरों को पकड़ने के नाम पर गुंडागर्दी पर लगाम लगा पा रही है।

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