
उत्तरकाशी। बरसात का सीजन करीब आने के साथ ही नगरवासियों के धड़कनें बढ़ने लगी है। पिछले वर्ष अगस्त की बाढ़ के बाद ऊंचे हुए नदी तल को अब तक सामान्य नहीं किया जा सका है। जोशियाड़ा वाले छोर पर चल रहे बाढ़ सुरक्षा कार्य के लिए नदी को नगर की ओर डाइवर्ट करने से तटवर्ती आबादी पर खतरा मंडराने लगा है। खतरे की जद में आई आबादी ने सरकार और प्रशासन से इस संबंध में कार्रवाई की मांग की है।
अगस्त की बाढ़ में जमा मलबे से असी गंगा और भागीरथी का नदी तल ऊंचा होने से तटवर्ती आबादी पर खतरे की बात प्रशासन ने भी स्वीकारी। सुरक्षा के लिहाज से मलबा हटाने के लिए निविदा भी आमंत्रित की गई। लेकिन अब तक अधिकांश संवेदनशील स्थानों से मलबा नहीं हटाया जा सका है। भागीरथी में बढ़ा पानी नदी तटों पर जोर मारने लगा है। हैरानी की बात तो यह है कि निविदा की शर्तों के मुताबिक नदी का बहाव बीच में करने के बजाय इसे नगर की ओर धकेल दिया गया है।
मणिकर्णिका घाट निवासी वरिष्ठ कांग्रेसी शेर सिंह सौंदाल ने कहा कि नदी में पानी खतरे की हद तक बढ़ गया है। शीघ्र नगर की सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए तो आने वाली बरसात में एक और तबाही का सामना करना पड़ेगा।
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पानी बढ़ने से नगर के पुरीखेत वाले छोर पर सुरक्षा दीवार का काम शुरू नहीं हो पाया। यदि मलबा हटाकर नदी का बहाव बीच में किया जाता तो ज्यादा समस्या नहीं आती। बरसात में पानी बढ़ने पर मलबा बहने से नदी का बहाव बीच में आ जाएगा। ऐसे में तटवर्ती आबादी पर फिलहाल खतरा नहीं है।- चंद्रशेखर सिंह, ईई सिंचाई विभाग उत्तरकाशी
