पांच हजार हेक्टेयर भूमि पर लहलहा रहा मडुवा

बागेश्वर। इस बार अच्छी बारिश होने और जैविक खाद के अधिक प्रयोग होने से डायबिटीज और पेट के अन्य रोगों के लिए रामबाण मडुवे की खेती पककर तैयार है। जिले में पांच हेक्टेयर भूमि में मडुवा बोया गया है। पौधों से अच्छी बाली निकलने और उसमें किसी प्रकार का रोग नहीं होने से किसानों के चेहरे खिले हुए हैं।
मालूम हो कि उपेक्षित समझा जाने वाला मडुवा जब से डायबिटीज और पेट के अन्य रोगों के लिए रामबाण साबित हुआ है तब से किसानों ने इसकी बुआई में अधिक रुचि लेनी शुरू कर दी है। जिले में इस वर्ष पांच हजार हेक्टेयर भूमि में मडुवा बोने का लक्ष्य था। जो शत प्रतिशत रहा। इस बार मडुवा को पानी नियमित मिला। जिससे उत्पादन में दो प्रतिशत और अधिक वृद्धि होने की संभावना है। काश्तकार दरवान सिंह, अमर सिंह, और राम चंद्र पांडे का कहना है कि मडुवे को इस बार पानी उसकी आवश्यकता के अनुरूप मिला जितना बीज बोया वह सभी जमा। सहायक कृषि अधिकारी हरीश चंद्र पाठक ने बताया कि बारिश अच्छी होने से समय पर गुड़ाई निराई और जैविक खाद का प्रयोग होने से पैदावार भी अच्छी होने की संभावना है। उन्होंने बताया कि इस बार मडुवे में किसी प्रकार का रोग नहीं है। मडुवे की विभिन्न किस्म के बीजों में बीएल 315, 149, के अलावा किसानों ने अपने बीज की बुआई भी की है। मडुवे का बीज काश्तकारों में सब्सिडी पर दिया गया है। श्री पाठक ने बताया कि तराई डेवलपमेंट बीज निगम विभाग के माध्यम से काश्तकारों से ग्रेडिंग के अनुसार मडुवा खरीदेगा। मडुवे का बाजार भाव इस समय 12 रुपये प्रति किलोग्राम है।

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