
पांच साल के रिकार्ड खंगाले जाएंगे
सोलन। पंजाब के युवाओं तक नशे की डोज पहुंचाने में लगी नालागढ़ पंजैहरा के जीएसवी फार्मा उद्योग पर आबकारी एवं कराधान, आयकर और सेंट्रल सेल्स टैक्स विभाग शिकंजा कसने के लिए नए सिरे से सर्वे करने जा रहे हैं। वहीं, संबंधित अधिकारियों के कमजोर सूचना तंत्र पर भी जांच बैठने वाली है।
दूसरी तरफ, राज्य दवा नियंत्रण प्राधिकरण और पुलिस विभाग ने इस मामले में किसी तरह की कोताही से इनकार करते हुए पंजाब पुलिस की कार्यप्रणाली पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। एहतियात के तौर पर बीबीएन में सभी फार्मा कंपनियों का सर्वे किया जाएगा। इसमें उत्पादन से लेकर वितरण तक जुड़ी तमाम जानकारियां जुटाई जाएंगी। टैक्स से संबंधित विभाग करोड़ों के कारोबार में जुड़े इस उद्योग के पिछले पांच साल के खरीद फरोख्त के रिकार्ड खंगाले जाएंगे और सर्वे होगा।
प्रदेश आबकारी एवं कराधान आयुक्त आरए नेगी ने कहा कि टैक्स संबंधी तीनों विभागों की इंटेलिजेंस मीटिंग में फार्मा हब को लेकर सूचनाएं शेयर होंगी। इसमें विवादित कंपनी के अधिकारी भी शामिल होंगे। यह बैठक जल्द ही चंडीगढ़ में होने जा रही है। फिलहाल संबंधित क्षेत्र के अधिकारियों को क्षेत्र में अन्य फार्मा यूनिट पर भी नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
टैक्स विभाग : इन बिंदुओं पर सर्वे
– पांच सालों में कितना टर्नओवर
– कितना राजस्व अब तक वसूला
– कच्चा माल कहां से आया
– उत्पादन में अन्य क्या क्या लागत
– तैयार माल कहां कहां भेजा गया
कार्यप्रणाली में यह चीजें तलाशेंगे
– क्यों कमजोर रहा विभाग का सूचना तंत्र
– क्या फील्ड स्टाफ के डीलर कांटेक्ट नहीं
– निर्देश, क्षेत्र में किस तरह की हुई कोताही
– सर्वे के आधार पर क्यों नहीं इन्फॉरमेशन
…..स्टोरी टू
सभी फार्मा यूनिट के रिकार्ड मंगवाए
दवा नियंत्रण प्राधिकरण के राज्य नियंत्रक नवनीत मरवाह ने कहा कि इस मामले में सभी दवा कंपनियों के रिकार्ड पंद्रह दिन के भीतर चेक किए जा रहे हैं। सर्व होगा, कम उत्पादन वाली कंपनियों पर विशेष जांच बैठेगी। बंद फैक्ट्रियों पर भी नजर रखी जाएगी।
कौन सी दवा कैसी दवा, जानकारी नहीं : एसपी
एसपी बीबीएन अरुल कुमार ने कहा कि पंजाब पुलिस ने मामले को लेकर कोई सूचना नहीं दी। दो दिन बाद बद्दी पुलिस को सूचना दवा नियंत्रण प्राधिकरण से मिली है। अब दवाएं कहां से बरामद की है, किसने बरामद की है, इसकी जानकारी प्रदेश पुलिस को नहीं है। उद्योग बंद पड़ा है। लेकिन पुलिस अब नशीली दवाओं की तस्करी को लेकर अधिक सजग रहेगी।
30 लाख का दिया टैक्स
अमर उजाला ने छानबीन में पाया है कि संबंधित कंपनी आबकारी एवं कराधान विभाग की पंजीकृत डीलर हैं। चालू वित्त वर्ष में 30 लाख तक का कंपनी कर चुकता कर चुकी है। कयास लगाए जा रहे हैं कि कंपनी दो नंबर के धंधे को व्हाइट बनाने के लिए टैक्स देकर विभाग से पल्ला छुड़ाती रही। अगर विभाग सही तरीके से सर्वे करता तो यह गोरखधंधा पकड़ा जा सकता था।
