पहाड़ नहीं मैदान चा‌हहिए

रुद्रप्रयाग। आपदा प्रभावितों की मैदानी क्षेत्रों में विस्थापन की चाह ने जिला प्रशासन को मुश्किल में डाल दिया है। प्रभावित आपदा से खौफ में हैं वह यहां नहीं रहना चाहते हैं। उनका तर्क है कि जब सरकार बाबा, बडे़ नेताओं और संस्थाओं को देहरादून या हरिद्वार में जमीन दे सकती है, तो आपदा प्रभावितों को क्यों नहीं।
अगस्त्यमुनि और चंद्रापुरी सहित अन्य इलाकाेमें विगत जून माह की बाढ़ में लोगों के घर बह गए थे। स्थिति यह है कि प्रभावितों के पास नया मकान बनाने लायक जमीन भी नहीं बची। बाढ़ से चंद्रापुरी गांव भी प्रभावित हो चुका है। यहां के 24 अनुसूचित जाति के परिवारों ने शनिवार को डीएम से मुलाकात कर उनके समक्ष कई सवाल उठाए और मैदानी क्षेत्रों में उनके स्थायी पुनर्वास करने की मांग की। आपदा प्रभावित बीरेंद्र, जगत लाल, प्रेम लाल, बिंदी लाल, अमर, दर्शन और हरेंद्र लाल ने बताया कि वह भूमिहीन परिवार के हैं और आपदा के बाद से वर्तमान में परिवार सहित टेंटों में रह रहे हैं। कुछ परिवार प्रशासन के आदेश पर किराए के भवनों में रह रहे हैं। आपदा के तीन माह बाद भी शासन स्तर से उनके स्थायी पुनर्वास के लिए ठोस कार्रवाई नहीं की गई। अब ठंड बढ़ने लगी है। नीचे गीली मिट्टी होने के कारण उस पर सोने से लोग बीमार हो रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से मैदानी क्षेत्रों ऋषिकेश, हरिद्वार और देहरादून में उन्हें स्थायी रूप से बसाने की मांग की है।

आपदा प्रभावित लोग मैदानी क्षेत्रों में बसाने की मांग कर रहे हैं। उनकी मांग को शासन को अग्रसारित किया जा रहा है। – दिलीप जावलकर, डीएम रुद्रप्रयाग।

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