
पौड़ी। जुनून और अनुशासन के साथ कड़ी मेहनत हो तो कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। इसी फार्मूले को शिद्दत से अंगीकार करने का नतीजा है कि देश के लिए सर्वश्रेष्ठ योगदान करने वाले बॉक्सर कर्नल पदम बहादुर मल्ल की बराबरी आज तक कोई नहीं कर सका।
राज्य स्तरीय बॉक्सिंग प्रतियोगिता की शान बढ़ाने पहुंचे एशिया के सर्वश्रेष्ठ मुक्केबाज कर्नल पदम बहादुर मल्ल ने एक खास मुलाकात में बताया कि पहाड़ाें में मुक्केबाजी की बहुत संभावनाएं हैं। यहां मेहनत का जज्बा लोगों की रगों में भरा है, लेकिन बेहतर प्रयासों की आवश्यकता है। वर्ष 1962 में जर्काता एशियाड में गोल्ड मेडल प्राप्त कर देश का नाम रोशन करने वाले कर्नल मल्ल पहले एक बेहतर फुटबॉलर थे लेकिन बॉक्सिंग के जुनून ने उन्हें नई ऊंचाइयाें तक पहुंचा दिया। सांइटिफिक बॉक्सिंग (प्रतिद्वंद्वी के वार का बचाव और अपने प्रहार सही लक्ष्य पर) के जनक कहे जाने वाले मल्ल के मुताबिक खेलों में फिक्सिंग और डोपिंग कलंक से कम नहीं है। ऐसी घटनाएं दुर्भाग्यपूर्ण हैं। बीसीसीआई में मची धमाचौकड़ी निराशाजनक है। नई पीढ़ी को वह सलाह देते हैं कि खेल का अभ्यास बगैर की किसी परिणाम के इच्छा से पूरी लगन के साथ करना चाहिए। सुखद परिणाम अपने आप सामने आ जाएंगे। आने वाले दिनों में बॉक्सिंग में देश के खिलाड़ी और अच्छा प्रदर्शन करेंगे इसकी पूरी उम्मीद है।
